मूकनायक राजस्थान बौद्धाचार्य पूरणमल बौद्ध
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गाडरवारा तहसील जिला नरसिंहपुर में भीम जयंती व्याख्यान का आयोजन किया गया ,जिसकी अध्यक्षता एडवोकेट एम आर चौधरी ने की,
उक्त कार्यक्रम में विशेष रूप से अनंत आदित्य मेहरा को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया, उक्त कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता एड. एन एस पटेल थे। कार्यक्रम को संबोधित करने वाले वक्ताओं में एड. राजेश चौधरी ,एड.पीसी मलैया, एड.आशीष गुप्ता ,एड. नरेश चौधरी, प्रमुख वक्ता एडवोकेट एन एस पटेल ,सभा के अध्यक्ष एडवोकेट एम आर चौधरी ने संबोधित किया तथा राजेंद्र सिंह राजपूत द्वारा मंच का संचालन किया गया।
उक्त व्याख्यान कार्यक्रम में संबोधित करते हुए वक्ताओं ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के जीवन पर निम्न अनुसार कर डालते हुए कहा कि डॉक्टर भीमराव रामजी अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू शहर के एक महार परिवार में हुआ था,
उनकी आज 134 में जयंती है जिसे देश गर्व के साथ मना रहा है,
डॉ आंबेडकर ने अपने जीवन काल में तमाम सभी प्रकार के शोषण ,जाति उत्पीड़नों को असमानताओं को झेलते हुए अद्वितीय सफलता हासिल की है,
डॉ भीमराव अंबेडकर में कई विशेषताएं छुपी हुई थी ,वे एक साथ राजनीतिक ,समाज सुधारक ,अर्थशास्त्री एवं शिक्षाविद विद्वान थे, उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय अमेरिका तथा स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स( यूके) से अपनी पढ़ाई पुरी की उनके पास 32 डिग्रियां थी,
डॉक्टर अंबेडकर जो 9भाषाओं के ज्ञाता थे, उन्होंने अपने जीवन काल में कई पुस्तकें लिखी है,
जिनमें प्रसिद्ध है हिंदुत्व का दर्शन ,पाकिस्तान और पार्टीशन आफ इंडिया ,जाति उन्मूलन, संघ बनाम स्वतंत्रता,प्रॉब्लम ऑफ़ रूपीस।
डॉक्टर अंबेडकर किसी राजनीतिक दल के सदस्य नहीं थे, फिर भी उन्हें भारत के प्रथम कानून मंत्री के रूप में जवाबदारी दी गई थी, जिसे उन्होंने बखूबी पूरा किया है।
डॉक्टर अंबेडकर ने संविधान का निर्माण किया था यह भी कहा जाता है वे संविधान सभा के अध्यक्ष थे ,
उन्होंने विश्व के सबसे अच्छे लिखित संविधान को बनाने में 2 वर्ष 11 में 18 दिन का अथक परिश्रम किया है। जिसमें हमें मौलिक अधिकार, स्वतंत्रता, समानता न्याय धर्मनिरपेक्षता इत्यादि राजनीतिक आर्थिक सामाजिक अधिकारों की समीक्षा कर उन्हें संविधान में समाहित किया है ,
इतना ही नहीं डॉक्टर अंबेडकर ने भारत के नागरिकों को अधिकारों के साथ-साथ उनके कर्तव्य का भी उल्लेखित किया है। लेकिन उन्होंने संविधान बनाने के बाद संविधान के संबंध में यह भी कहा था कि – चाहे संविधान कितना अच्छा हो यदि उसे लागू करने वाले अच्छे नहीं होंगे तो अच्छा संविधान किस काम का,
डॉ आंबेडकर जन्म से हिंदू थे ,किंतु उन्होंने बाद में बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया था, उनके प्रसिद्ध नारे थे शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो, इतना ही नहीं डॉक्टर अंबेडकर ने एक राजनीतिक पार्टी भी बनाई थी ,जिसका नाम था भारतीय रिपब्लिक पार्टी। डॉ आंबेडकर जीवन भर समाज में समानता लाने के लिए संघर्ष करते रहे वे दलित और गरीबों की आवाज थे ,उन्होंने छुआछूत के खिलाफ आंदोलन चलाए, वे सच्चे देशभक्त, समाज सुधारक थे।
उनका कहना था की जाति के आधार पर किसी को ऊंचा कहना और अपने आप को नीचा कहना महापाप है ,डॉ भीमराव अंबेडकर मनुवाद के खिलाफ थे उन्होंने 25 दिसंबर 1927 को ब्राह्मणवाद के प्रसिद्ध ग्रंथ मनु स्मृति को जलाया था, जिसे मनुवाद ब्राह्मणवाद के खिलाफ संघर्ष की शुरुआत भी कहा जाता है।
डॉ आंबेडकर को भारत सरकार ने भारत रत्न जैसे पुरस्कारों से सम्मानित किया था, इसके अलावा उन्हें बोधिसत्व द ग्रेटेस्ट इंडिया आदि पुरस्कार भी दिए गए थे,
डॉक्टर अंबेडकर की मृत्यु 6 दिसंबर 1956 को नई दिल्ली में हुई है।
हमें डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के आदर्शों से सीखना चाहिए उनके बताए गए आदर्शों पर चलकर सामाजिक सुधार के कार्य को आगे बढ़ना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धा होगी।

