मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अर्थशास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है, जो वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण और उपभोग का विश्लेषण करता है। दूसरे शब्दों में, यह एक ऐसा अनुशासन है, जो इस बात से संबंधित है कि लोग क्या विकल्प चुनते हैं और खरीदारी करते समय वे उन्हें कैसे और क्यों चुनते हैं ? अर्थशास्त्र का एक सिद्धांत है, जिस चीज की बाज़ार में कमी होती है, उसकी डिमांड ज्यादा होती है । आप “ईमानदार” बने रहिये, रिश्तों के बाज़ार में फ़िलहाल इसकी बेहद कमी हो गयीं हैं । आपकीं डिमांड हमेशा रहेंगी ।।
अर्थशास्त्र का पूरा विषय व्यवसाय को समझना है, तथा यह समझना है कि मानवीय आवश्यकताओं और इच्छाओं को पूरा करने के लिए संसाधनों का किस प्रकार उपयोग किया जाता है। इसमें विकल्पों और अभावों का अध्ययन तथा सीमित संसाधनों और असीमित इच्छाओं के बीच सामंजस्य स्थापित करने के तरीकों का विकास शामिल है। कहते हैं कि हाल पूछ लेने से कौन सा हाल ठीक हो जाता है, बस तसल्ली हो जाती है कि इस भीड़ भरी दुनिया में कोई अपना भी है क्योंकि संबंध उसी आत्मा से जुड़ता है, जिनका हमसे, पहले का कोई गहरा रिश्ता होता है, वरना दुनिया की इस भीड़ में कौन किसको जानता है । आप तो नेक काम करते रहे, कोई आपको सम्मानित करे या ना करे, परंतु आपकी अंतरात्मा सदैव आपका सम्मान करेगी ।
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

