मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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केवल मनुष्य ही एक मात्र ऐसा प्राणी है जिसका व्यक्तित्व निर्माण प्रकृत्ति से ज्यादा उसकी स्वयं की प्रवृत्ति पर निर्भर होता है । व्यक्तित्व का निर्माण कई कारकों से प्रभावित होता है, जिनमें आर्थिक और सामाजिक स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किसी भी व्यक्ति की आर्थिक समृद्धि, सामाजिक प्रतिष्ठा और जीवनशैली ही उनके सोचने-समझने, व्यवहार और आत्मविश्वास को आकार देने में मुख्य भूमिका निभाती है। वहीं व्यक्तित्व निर्माण के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण सूत्र भी हैं, जिनमें आत्म-जागरूकता, सकारात्मक सोच, निरंतर सीखने की इच्छा, दृढ़ संकल्प, और दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करना शामिल है । आत्म-चिंतन, निरंतर सीखना, प्रभावी संचार, सकारात्मक मानसिकता विकसित करना और व्यक्तिगत सौंदर्य पर ध्यान केंद्रित करके , व्यक्ति अपने व्यक्तित्व को निखार सकते हैं और दूसरों पर अनुकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
इसके अलावा कौशल और योग्यताएं भी आपके व्यक्तित्व का मूल होती हैं । ये पहली मुलाकात में ही सामने वाले व्यक्ति पर आपका प्रभाव जमाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । मनुष्य अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है, वह जैसा सोचता है, वैसा बन जाता है।मनुष्य और अन्य प्राणियों के बीच का जो प्रमुख भेद है, वह ये कि मनुष्य के सिवा कोई और प्राणी श्रेष्ठ विचारों द्वारा एक श्रेष्ठ जीवन का निर्माण नहीं कर पाता है। मगर एक मनुष्य में जीवन के अंतिम क्षणों तक जीवन परिवर्तन के द्वार सदा खुले रहते हैं। वह अपने जीवन को अपने हिसाब से उत्कृष्ट या निकृष्ट बना सकने में समर्थ होता है। एक मनुष्य के जीवन में नर से नारायण बनने की प्रबल संभावना होती है..
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

