मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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हमारी सोच और भावनाओं के प्रति हमें सावधान रहना चाहिए, क्योंकि हर विचार भविष्य का बीज है। जैसे विचार होगे, वैसे ही शब्द बनेंगे, जैसे शब्द होंगे, वैसी ही वाणी होगी और जैसी वाणी होगी, वैसा व्यवहार होगा। प्रकृति आखिर वही लौटाएगी, जैसा हम बीज बोएँगें क्योंकि सच्चे इंसान की पहचान उनके आचरण, नैतिकता, ईमानदारी, समर्पण, और संवाद में दिखती है। वे दूसरों के साथ सहयोगी और उदार होते हैं और बुराई से बचने के लिए प्रयासरत रहते हैं। सच्चे इंसान कार्यों में और विचारों में भी सहयोगी और निष्कल्प दिखते हैं, और वे अपने वादिता को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं।
सकारात्मक सोच सोने की खदान की तरह है, जिसमें हम जितना उतरेंगे, हमारा जीवन उतना ही सफल और मूल्यवान होता जाएगा। हमें इस बात की जागरूकता रखनी चाहिए कि मन और पर्यावरण दोनों में ही प्रदूषण न फैले। अच्छी सोच रखने वाले का सुख उसका वैसे ही अनुसरण करता है, जैसे गाड़ी के चक्के, गाड़ी का अनुसरण करते हैं । भावनाओं को समझना और व्यक्त करना मुश्किल हो सकता है । भावनाएं जटिल और बहुआयामी होती हैं । हर व्यक्ति की भावनाएं अलग-अलग होती हैं । इसलिए किसी और को यह समझाना मुश्किल हो जाता है कि हम कैसा महसूस कर रहे हैं ।
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

