मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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रिश्ता या सम्बन्ध मात्र एक शब्द नहीं, अपितु त्याग बलिदान और समर्पण से भरा सम्पूर्ण ग्रन्थ है, परंतु आज के समय में रिश्ते केवल स्वार्थ पूर्ति का साधन बन गए हैं, “काम खत्म, रिश्ते खत्म “। दूर के रिश्तों की बात छोड़िए आजकल तो माँ बाप को भी पैसे के लिए इस्तेमाल किया जाता है। आज समाज में मानवीय मूल्य तथा पारिवारिक मूल्य धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहे हैं। ज़्यादातर व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए रिश्ते निभाते हैं, अपनी आवश्यकताओं के हिसाब से मिलते हैं। अमीर रिश्तेदारों का सम्मान करते हैं, उनसे मिलने को आतुर रहते हैं जबकि गरीब रिश्तेदारों से कतराते हैं। माना कि समय बदल रहा है, शिक्षा का विस्तार हुआ है, समृद्धि आई है, परंतु इसके साथ साथ संस्कृति और संस्कारों का भी हनन हुआ है और इसी कारण रिश्ते नातों की अहमियत खत्म हो रही हैं। असली ताकत रिश्ते जोड़ने में नहीं, बल्कि जोड़े रखने में होती है। जीवन में कुछ बनना है तो विनम्र रहना सीखों ।
ज्यादातर रिश्ते आजकल दिखावटी रह गए हैं, जैसे पति पत्नी एकसाथ अगर किसी शादी, पार्टी में जाते हैं तो लगता है कि आपस में बहुत प्यार होगा परन्तु सच में यह एक समाज के सामने दिखावा होता है । असल में वो एक छत के नीचे रहते हुए भी अलग अलग जीवन जीते हैं और कुछ ऐसे रिश्ते देखने में आते हैं जो घर से बाहर अपनी पत्नी के अलावा भी किसी दूसरी औरत के साथ संबंध बनाए रखते हैं, तो कहां है रिश्ते की सच्चाई और वो शादी के समय खाई गई कस्मे । आज रिश्तों में हम स्वार्थी हो गए हैं, सहनशीलता, त्याग, एकता आदि सब खत्म होता जा रहा है । रिश्तों में एक पार्टनर हमेशा दबता रहता है । एक दूसरे का अपमान, क्रोध, हिंसा और तलाक, यह सब तो बहुत ही ज्यादा हो गया है । यहां तक कि छोटी छोटी बातों को लेकर मारपीट और खून खराबा तक हो जाते हैं। दहेज के लिए बहू को जलाना, पैसे के लालच के लिए बहू पर अत्याचार करना, यहां तक कि बच्चा ना होने पर कलंकी कहना और तो और दूसरी शादी करना, पहली बीबी के रहते भी दिखाई देता है । इसलिए “विचार” अपने रखो “जीवन” में तो “जीने” का “मज़ा” आएगा । “दूसरों” की “हाँ में हाँ” मिलाओगे तो सिर्फ “इस्तेमाल” किये जाओगे। बाकी रिश्तों की पाठशाला, अगर बनाएं रखनी है, तो गणित और राजनीति विषय का कमजोर होना बहुत जरूरी है। याद रखना शांत मन के लोग जीवन जीते हैं और अशांत मन के लोग जीवन काटते हैं..
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

