Thursday, February 26, 2026
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प्रसन्नता विश्वास और आनंद में छिपी है सुखमय जीवन की खूबसूरती

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जिन्दगी को खुश रहकर जियो क्योंकि रोज शाम सिर्फ सूरज ही नहीं ढ़लता, बल्कि हमारी अनमोल जिंदगी भी ढ़लती है । आज व्यस्तता, तनाव व असमाधानी वृत्ति ने अधिकतर लोगों का सुख-चैन छीन रखा है। धन दौलत, महंगी कार, बड़े बड़े बंगले, पद, पहचान, प्रभाव व पैसा होने पर भी आत्मिक संतुष्टि, तृप्ति व समाधान का अभाव जीवन को नीरस बना रहा है। ऐसे में निर्मल आनंद कैसे मिले? यह सीखना होगा, समझना होगा व छोटी-छोटी खुशियों का महत्व समझना होगा अन्यथा पूरी जिंदगी बीत जाएगी, कट जाएगी लेकिन जिंदगी जी नहीं जाएगी। कहते हैं कि हजारों साल की पुरानी कायनात में आप सिर्फ यहां 70-80-100 साल के लिए आते हैं। उसके अलावा कुछ भी नहीं !! यहां हमको 500 साल नहीं रहना है।
इसलिए अपनी अकड़ को फूं-फा व नकारात्मक और नजरअंदाज की भावना से ये सोचकर आप उसे पीछे धकेल दिया करो क्योंकि आप यहां एक मेहमान है, थोड़े से वक्त के लिए आए हैं और यह वक्त बहुत करीब है कि वापस अपने घर चले जाना है। जीवन का आनंद लेने के लिए, आपको अपने जीवन में संतुलन बनाना होगा और अपने जुनून और रुचियों को प्राथमिकता देनी होगी । इसके अलावा, आपको अपने मन को शांत करना होगा और अपने अहंकार से मुक्त होना होगा । जब भी दिल में बड़ा गुमान आए या कोई फक्र करने का दिल करे, तो यह सोच लिया करें कि इस धरती पर आपसे पहले बहुत बड़े-बड़े यहां रहकर चले भी गए हैं, जिनका आज नामोनिशान नहीं है । हमेशा प्रसन्न रहकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना जीवन का सबसे सर्वोत्तम उपयोग है। इसलिए जागरूक रहकर जिंदगी का भरपूर आनंद लें और जीवन का सदुपयोग करें क्योंकि प्रसन्नता, विश्वास और आनंद में ही छिपी है सुखमय जीवन की खूबसूरती
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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