मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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समय जीवन का सबसे कीमती संसाधन है। यह ऐसा अमूल्य खजाना है जिसे किसी भी कीमत पर वापस नहीं पाया जा सकता। समय का प्रभावी उपयोग न केवल हमारी व्यक्तिगत प्रगति में मदद करता है, बल्कि समाज और राष्ट्र की उन्नति में भी योगदान करता है। इंसान ही इंसान की दवा है । जैसे-जैसे हमारी जागरूकता में तीव्रता और पैनापन आने लगता है, एक बात जिसके बारे में हम स्वभाविक रूप से सबसे पहले जागरूक होते हैं, वह है सांस। हमारे शरीर में चलने वाली सांस, एक यांत्रिक प्रक्रिया है, जो लगातार बिना रुके चलती है। यह बहुत आश्चर्यजनक है कि कैसे अधिकतर लोग इसके बारे में जागरूक हुए बिना ही जीते रहते हैं, लेकिन एक बार जब आप सांस के बारे में जागरूक हो जाते हैं, तो ये एक अदभुत प्रक्रिया बन जाती है। दुःख देता है, तो कोई सुकून बन जाता है । जीवन में केवल दो ही वास्तविक धन हैं 👉🏽 “समय और सांसें” 👈🏽 और दोनों ही निश्चित और सीमित हैं ।
इसलिए समय और सांसों को समझदारी से खर्च करें क्योंकि प्रेम, सहयोग, विश्वास, निष्ठा, सुरक्षा, सहानुभूति और सम्मान, ये सभी ऐसे भाव हैं, जो परायों को भी अपना बना देते हैं। कहते हैं कि त्याग स्नेह से श्रेष्ठ है, चरित्र सुंदरता से श्रेष्ठ है, मानवता सम्पत्ति से श्रेष्ठ है, परंतु परस्पर सम्बन्धों को जीवित रखने से अधिक अन्य कुछ भी श्रेष्ठ नहीं है क्योंकि पारस्परिक संबंधों को सहानुभूति से कई तरह से लाभ मिलता है। जब आप दिखाते हैं कि आप वही महसूस करते हैं जो कोई और महसूस कर रहा है, तो इससे दूसरे व्यक्ति को अपनेपन का एहसास होता है। इससे दूसरों को यह महसूस होता है कि उन्हें समझा जा रहा है, और यह समझ ही रिश्तों में विश्वास और निकटता की नींव के रूप में काम करती है ।
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

