मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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किसी अच्छे इंसान के साथ हद से ज्यादा बुरा सुलूक मत कीजिये क्योंकि सुन्दर काँच जब टूटता है तो धारदार हथियार बन जाता है । जीवन का चक्र दर्द से शुरू होता है और दर्द के साथ ही खत्म होता है। एक चक्र जन्म से शुरू होता है, बचपन, वयस्कता, फिर वयस्कता और फिर, समय के अनुसार, जीवन समाप्त हो जाता है। जीवन और मृत्यु का प्रत्येक चक्र नएपन को अपनाने का अवसर प्रदान करता है । वहीं जीवन और पीड़ा के बीच आवागमन एक ऐसा स्थान है, जहां हम अनुकूलन करना, जिज्ञासा विकसित करना और स्थायी परिवर्तन करना सीख सकते हैं क्योंकि सभी प्राणियों का जीवन एक दूसरे के दर्द में सहयोगी बनने पर ही आश्रित है ।
दुर्व्यवहार नामक दर्द के सबसे हानिकारक परिणामों में से एक यह है कि लोग खुद को अलग-थलग कर लेते हैं और रिश्तों से बचना पसंद करते हैं क्योंकि उनका भरोसा टूट चुका होता है और उन्हें फिर से धोखा दिए जाने का डर होता है। अगर कोई इंसान आपके साथ कुछ भी बुरा कर रहा है तो हमें बुराई की गंभीरता को देखते हुए ही प्रतिक्रिया करनी चाहिए। अगर बुराई क्षमा योग्य है तो एक या दो बार क्षमा कर देना चाहिए। महापुरूष कहते हैं कि “क्षमा बड़न को चाहिए छोटन को उत्पात”, लेकिन छोटे इतना भी उत्पात न मचा दें कि हमें घर से सड़क पर लाकर खड़ा कर दें। इस लिए बुराई एक सीमा तक ही बर्दास्त या सहन की जानी चाहिए। उसके आगे कतई नहीं। इसके साथ साथ अपना दर्द भी सबको न बताएं क्योंकि सबके घर मरहम नहीं होता, मगर नमक हर घर में होता है ।
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

