मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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सभी अनुभवों का स्वागत कीजिए, पता नहीं कौन सा अनुभव आपकी जिंदगी बदल दें। अगर आपकी बहस बदतमीज इंसान से हो तो हार मान लेनी चाहिए क्योंकि आपकी आवाज कितनी ही दमदार हो आप एक कुत्ते से अच्छा भौक नहीं सकते। ये बात आप अपनी आखों से ही देख चुके है । हर व्यक्ति के अनुभव के आधार पर उसके कार्यों में परिवर्तन होता रहता है। अनुभव के इस प्रकार लाभ उठाने की क्रिया को सीखना या अधिगम कहते हैं। प्रत्येक प्राणी अपने जीवन में कुछ न कुछ सीखता है। जिस व्यक्ति में सीखने की जितनी अधिक शक्ति होती है, उतना ही अधिक उसके जीवन का विकास होता है।
अपनी कमियों पर भी थोड़ी नजर रखो, हर बार दूसरों की गलतियों को देखना भी ठीक नहीं है, अपने मन को भी थोड़ा साफ़ रखो, हर बार दूसरों के बारे में गलत सोचना ठीक नहीं है। इसलिए रखा करों नजदीकियां, जिन्दगी का कुछ भरोसा नहीं, फिर मत कहना चलें भी गए और बताया भी नहीं । दूसरों के अनुभव सुनकर, अपने अनुभव दूसरों के सामने रखकर और अनुभवों की समानता देखकर कुछ ठोस निष्कर्षों पर भी पहुंचना संभव होता है। यह भी समझ बनती है कि सिखाने की प्रक्रिया एक निरन्तर प्रयोग है, जो कभी तो सफल हो जाता है और कभी नहीं। प्रयोग का सफल हो जाना भी उतना ही सही है जितना उसका विफल रहना क्योंकि दोनों परिस्थितियों में बहुत कुछ सीखा जा सकता है। बाकी जो लिबासों को बदलने का बहुत शौक रखते थे। आखिरी वक्त पर कह भी न पाये कि कफ़न ठीक नहीं….
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

