Thursday, February 26, 2026
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स्वार्थ और मतलब के चलते समाज में नैतिकता और ईमानदारी की कमी से लोगों की हिलने लगी है आस्था

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आस्था ह्रदय की बुद्धिमत्ता है। ह्रदय हर अनुभव से अपनी निष्ठा की जड़ें मजबूत करता है। वर्तमान समय में नैतिक मूल्यों का पतन तेजी से हो रहा है। इंसान इंसान के बीच अविश्वास की बढ़ता जा रहा है। आचरण के अभाव में सर्वत्र अराजकता दिखाई देती है। जीवन से सुख शांति और सरलता मानो विदा हो चुकी है। संस्कारों के अभाव में नैतिकता का स्तर गिरना स्वाभाविक है। आस्था बिना ईमानदारी के सम्भव नहीं है। जहां ईमानदारी नहीं है, वहां नेक नियति नहीं है और यहीं से धोखा, मक्कारी और बेईमानी शुरू हो जाती है। इसके बिना इंसान केवल अपना स्वार्थ सोचता है और ऐसा इंसान अपने छोटे से फायदे के लिए दूसरों का बड़े से बड़ा नुक़सान भी कर सकता है।
जीवन के महान मूल्यों के बारे में लोगों की आस्था इसलिए हिलने लगी है क्योंकि समाज में नैतिकता और ईमानदारी की कमी होती जा रही है। लोग स्वार्थी और लालची होते जा रहे हैं। निष्ठा और नेक नियति का संयुक्त प्रभाव इंसान को मानसिक, भावनात्मक और अध्यात्मिक रुप से समृद्ध करता है। इन दोनों के मेल से उत्पन्न होने वाली शक्ति समाज में भी बदलाव ला सकती है और समाज के लोग अपनी आस्थाओं को जब ईमानदारी से जीते हैं तो शांति , सहयोग और समानता की भावना स्थापित होती है।
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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