मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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मन को वश में करना बड़ा कठिन होता है। हर व्यक्ति सुख पाने की लालसा रखता है परंतु अपने सुख के लिए दूसरों को दुखी कर स्वयं को नष्ट करने जैसी स्थिति पैदा भी करता है क्योंकि हम अपने सुख के लिए किसी भी पाप को करने के लिये तैयार हो जाते हैं। सुख का आनंद और दुःख का समाधान ही जीवन है। जो आनंद शांत रहकर चुप रहने में है, वो शिकायत करने में नहीं… क्योंकि… अज्ञान की शक्ति क्रोध है और ज्ञान की शक्ति मौन है।
कहते हैं कि गूंगा वो नहीं होता जो बोल नहीं पाता है बल्कि गूंगा वो होता है जो सच का पता होने पर भी चुप रहता है! वैसे आप कुछ भी कर लो जिसे कमियां ढूंढने की आदत होती है, उसे आप कभी खुश नहीं कर सकते। इसलिए नसीहत अवश्य दीजिए, मगर शर्मिंदा न कीजिए क्योंकि उद्देश्य दस्तक देना है, दरवाजा तोड़ना नहीं। बाकी:- कभी-कभी किसी को जीते जी भी कंधा दीजिए, जरूरी नहीं कि हर रस्म मौत के बाद ही निभाई जाए ।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

