मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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वक्त को हम जीत नहीं सकते बल्कि हम वक्त से सिर्फ सीख सकते हैं । जीवन में हमें कभी किसी भी ख़ास समय का इंतज़ार नहीं करना चाहिए बल्कि अपने हर समय को ख़ास बनाने की पूरी कोशिश करनी चाहिए । जीवन एक लम्बी दौड़ की तरह है, जिसमें समय सबको एक समान मिलता है, लेकिन इसमें विजेता वही होता है जो सबसे कम समय में अपने लक्ष्य पर पहुंच जाता है । इसलिए समस्याओं पर बहस करने के बजाय उसके समाधान पर जोर देना ज्यादा बेहतर होता है।
वक्त होने पर बात करना और वक्त निकाल कर बात करना दोनों में बहुत फर्क होता है। कहते हैं कि बुद्धिमानी यदि चालाकी बन जाती है तो अज्ञान की ओर ले जाती है । बुद्धिमानी यदि सरलता बनती है तो ज्ञान की ओर ले जाती है । इसलिए शुक्रगुजार रहो उन तमाम लोगों के, जिन्होंने बुरे वक्त में आपका साथ छोड़ दिया क्योंकि उन्हें भरोसा था कि आप मुसीबतों से अकेले ही निपट सकते हैं। समय की कीमत समझना और इसका सही दिशा में उपयोग करना ही जीवन को सार्थक और सफल बनाता है । बाकी:- आजमाओगे तो हर कोई गलत है और समझोगे तो हर कोई अपनी जगह सही है ।
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

