Thursday, February 26, 2026
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रिश्तो में आने वाली खटास की मुख्य वजह है स्वार्थ

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आज के परिवर्तनशील माहौल में आमतौर पर लोग अपने स्वार्थ के लिए मित्रता करते हैं, रिश्ते बनाते हैं, लेकिन ऐसे रिश्ते स्वार्थ पूरा होने के बाद टूट जाते हैं, जिन रिश्तों में स्वार्थ होता है, अक्सर वे अधिक समय तक टिक नहीं पाते हैं। अगर रिश्तों में प्रेम और नि:स्वार्थ की भावना होगी तो वे आजीवन बने रहते हैं। वर्तमान में कोई खाली नहीं है, सभी भरे हुए हैं। कोई प्रेम से भरा है, कोई घृणा से, कोई स्मृतियों और कोई दुःख से भरा है । अगर गहनता से गौर करें तो रिश्तों में आने वाली खटास और मनमुटाव का मुख्य कारण स्वार्थ ही है। वैसे भी चतुरयुग चल रहा है, इसलिए ये विचार दिल से निकाल दीजिए कि बिना स्वार्थ के कोई आपसे रिश्ता रखेगा । हकीकत में साथ तो अंत में जिंदगी भी छोड़ जाती है, फिर इंसान क्या चीज है ।
किसी भी रिश्तें को खराब होने का पूर्ण जिम्मेदार हमेशा सामने वाला ही नहीं होता, बल्कि कहीं ना कहीं आप भी होते हो। इसलिए जब भी रिश्तों के प्रति प्रेम, कर्तव्य, कृतज्ञता की भावना ही खत्म हो जाए तो ऐसे रिश्तें को बोझ की तरह ढ़ोने से अच्छा है कि आप स्वयं को और अपने रिश्तों को समय दें, जिससे आप उनमें हुई गलतियों को समझ सकें । कहते हैं कि केवल रक्त संबंध से कोई अपना नहीं होता, बल्कि प्रेम, सहयोग, विश्वास, और सम्मान ये सारे ऐसे भाव हैं, जो परायों को भी अपना बना देते हैं । अगर जिंदगी में सच्चा प्रेम लिखा है, तो उस इंसान को चाहे हजारों इंसानों में खड़ा कर दो, वो फिर भी आपका ही रहेगा । रिश्ते तभी फलते-फूलते हैं, जब दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे का समर्थन और सम्मान करें। स्वार्थ को हटाकर यदि रिश्ता प्यार और पारस्परिकता पर आधारित हो, तो यह जीवन को सुखद बना देता है।”
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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