मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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हम नींद में सपने देखते हैं, लेकिन प्रकृति हमें हर दिन नींद से जगा कर उन सपनों को पूरा करने के लिए एक मौका देती है। जीवन की पाठशाला दुनिया की हर पाठशाला से बड़ी है। इसका सबक जिसने ईमानदारी से सीख लिया, वह व्यक्ति हमेशा प्रगति करता है। इस पाठशाला का सबसे बड़ा सबक तो यही है कि ‘गलतियों को दोहराओ मत और जब भी जहाँ भी, जिस किसी से भी, जो अच्छा सीखने को मिले, उसे ग्रहण करो।हर व्यक्ति का जीवन में एक प्रमुख लक्ष्य होता है, जिसमें दूसरों की मदद करना, समाज में सकारात्मक योगदान देना, अपने क्षेत्र में बेहतरीन शिक्षा और कार्य के अनुभव को प्राप्त एक स्वस्थ और फिट जीवन जीने का लक्ष्य शामिल है, जो जीवन को सम्पूर्ण और संतुलित बनाते हैं ।
इस दुनिया में मानव जीवन ही सबसे बड़ी पाठशाला है । हम कौन सी कक्षा में हैं, पता नहीं, परीक्षा कब और कहां किस रूप में होगी, यह भी पता नहीं है। शायद इसीलिए जिंदगी हमें हमेशा एक नया पाठ पढ़ाती है, लेकिन यह हमें समझाने के लिए नहीं बल्कि हमारी सोच बदलने के लिए है । वैसे भी कर्म के बीज अच्छे हो या फिर बुरे हो, अपने समय पर पेड़ बनकर फल जरूर देते हैं। बाकी:- इंसान ही इंसान का रास्ता काटता है, बिल्लियां तो यूं ही बदनाम है….
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

