ललितपुर ब्यूरो (मूकनायक) हम बात कर रहे हैं जिला ललितपुर अंतर्गत महरौनी क्षेत्र कि जहां अवैध प्लाटिंग का कारोबार बहुत ही धड़ल्ले से फल फूल रहा है।अधिकतर काटी गई कॉलोनियों में ना तो किसी मानक को अपनाया गया है और ना ही भारत सरकार के नियम कायदों को। जिस प्रकार से भारत सरकार ने कॉलोनी काटने के लिए बंधुत्व बनाए रखने हेतु नियम कानून बनाए हैं उनको अवैध प्लाटिंग बालों ने तनिक भी नहीं अपनाया है। जिस प्रकार से किसी भी कार्य को करने से पहले हमें समस्त नियम कानून और कायदों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी करनी चाहिए, उसके बाद ही किसी कारोबार को किया जाता है मगर आज के समय में ज़्यादा पैसा कमाने कि होड ने सारे नियम कायदे केवल कानूनी किताब बन कर रह गए हैं।
कस्बा महरौनी के सभी जगह कॉलोनियों काटी गईं और उनका सरकारी हिसाब से कोई भी मानक सही और सटीक नहीं बैठते। जिस प्रकार से सरकारी नियम नम्बर… (1) बिना ले आउट के प्लाटिंग करना अवैध है। क्या कस्बा महरौनी में जितनी भी प्लाटिंग कि गईं हैं वह ले आउट के अंतर्गत कि गईं हैं या नहीं। आखिर ले आउट है क्या? ले आउट सरकारी वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत हमें सरकार से परमीशन लेनी होती है और सरकार के सामने हमें अपना एक नमूना पेश करना होता है कि हम इस प्रकार से उस जमीन पर प्लाटिंग करेंगे, जहां किस जगह प्लाट होगा किस जगह बगीचा होगा और किस जगह रास्ता होगा। और कितनी चौड़ी सड़क और गार्डन भी होगा, मगर आज के समय में भूमाफिया बगैर ले आउट के प्लाटिंग कर रहे हैं जिसमें बगीचा तो अधिकतर कहीं देखने को नहीं मिलेगा और ज़्यादा पैसे कमाने के लिए चौड़ी सड़कों कि जगह सकरी सड़कों का निर्माण ही कराया जाता है।
प्लॉट खरीदने से पहले खरीददार को यह जान लेना अति आवश्यक है कि उक्त प्लॉट विक्रेता का ले आउट पास प्लान पास है या नहीं, क्या वह सारे नियम कायदों को ले कर चल रहा है या नहीं यदि वह यह सारे नियमों को लेकर नहीं चल रहा है तो ऐसी जगह प्लॉट लेने से पहले हमें सोचना अति आवश्यक है।लेआउट प्लान में प्लॉटिंग करने वाले को सड़क, बिजली, पानी, सीवर, ड्रेनेज, पार्क जैसी सुविधाओं का प्रविधान करना होता है।” प्लाटिंग करने के लिए टाऊन एण्ड कंट्री प्लानिंग विभाग से ले आउट का अप्रूवल कराना जरुरी होता है। और लेआउट अप्रूवल के बाद ही प्लॉट विक्री कि जा सकती है।
यदि ऐसा नहीं है तो अवैध कॉलोनियों को काटने वालो पर बिना लेआउट के प्लाटिंग करने पर अवैध प्लाटिंग का मामला दर्ज किया जा सकता है, जिससे प्लॉट खरीदने वाले इससे अछूते नहीं रहेंगे। टाऊन एण्ड कंट्री विभाग से अप्रूवल कराना चाहिए और अप्रूवल कराने के लिए सड़क,नाली और बगीचा के लिए 55% जमीन रिजर्ब रखनी होती है, जो महरौनी में कहीं भी नहीं देखी जा सकती। और प्लॉट निर्माण करने के लिए स्थानीय नगर पंचायत से अनुमति लेनी होती है तो क्या समस्त प्लॉट खरीदने बालों ने यह कार्य किया है क्या नगर पंचायत से अनुमति ली या नहीं ली। वहीं कृषि भूमि पर भी प्लॉट खरीदने के बाद पंजीकरण कराना चाहिए क्योंकि अधिकतर प्लॉट का विक्रय कृषि भूमि पर ही किया जा रहा है तो क्या इस नियम को भी प्लाटिंग करने बालों और खरीदने बालों के द्वारा अपनाया जा रहा है या नहीं, हमारा तो यही मानना है कि महरौनी में तो कतई नहीं।

