Thursday, February 26, 2026
Homeदेशमहंगी शिक्षा से ग्रस्त है वंचित समाज

महंगी शिक्षा से ग्रस्त है वंचित समाज

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍🏻✍🏻
महंगी शिक्षा का खर्चा वहन ना करने के कारण आज गरीबी से ग्रस्त परिवार सरकारी रहमोकरम पर जिल्लत भरी जिंदगी जीने को मजबूर हैं, जबकि अमीर अपने धन के बल पर महंगी शिक्षा पाने में सफल हो रहा है। सावित्रीबाई फुले ने लड़कियों और समाज के गरीब व बहिष्कृत लोगों को शिक्षा प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभाई । वह भारत की पहली महिला अध्यापिका सन् 1848 में बनीं और उन्होंने अपने पति ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर लड़कियों के लिए एक विद्यालय खोला, परंतु आज शिक्षा एक व्यवसाय का रूप ले चुकी है। इसमें केवल धन कमाने का खेल है। देश में आई समृद्वि भी इस खेले में शामिल हो गई है। शिक्षा का निजीकरण और महँगी शिक्षा- आज समाज पर वणिक मानसिकता हावी है। शिक्षा भी, जिसे हमारी संस्कृति में निःशुल्क प्रदान करना और कराना महान पुण्य कार्य समझा जाता था, आज व्यवसायी मानसिकता का शिकार हो गई है। शिशु-शिक्षा से लेकर उच्चतम शिक्षा की दुकानें धड़ाधड़ खुलती जा रही हैं।
अब निजीकरण के सर्वग्रासी प्रेत ने शिक्षा को भी अपने शोषण के जाल में फंसा लिया है। इन शिक्षा व्यवसायियों को देश और समाज के हितों से कोई सरोकार नहीं है। उनके लिए विद्यालय चलाना एक लाभकारी निवेश से अधिक कुछ नहीं है। शिक्षा उन करोड़ों गरीब, वर्किंग क्लास, निम्नवर्गीय और यहां तक कि मध्यमवर्गीय परिवारों की कहानी भी है जो अपने बच्चों की अच्छी और ऊंची शिक्षा के लिए पेट काटकर, जमीन गिरवी रखकर और कर्जे लेकर फ़ीस और दूसरे खर्च चुकाने की समस्या से आत्महत्या तक करने को मजबूर हैं । मुश्किल यह है कि पिछले कुछ दशकों में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा खासकर इंजीनियरिंग-मेडिकल और दूसरे प्रोफेशनल कोर्सेज की फ़ीस और दूसरे खर्चों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है जिसके कारण शिक्षा आम ग़रीब और वर्किंग क्लास परिवारों की पहुंच से बाहर होती जा रही है जिसके लिए सरकार को जनहित में कड़े प्रावधान करना चाहिए।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments