मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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मन में आने वाले विचार की आयु सिर्फ एक पल की होती है, किन्तु इससे होने वाले प्रभाव को हम अनंत समय तक महसूस करते हैं। इंसानी दिमाग बहुत पावरफुल है । खरबों न्यूरॉन से बनी प्रकृति की अब तक की सबसे उत्कृष्ट रचना जैसा दिमाग हमारे पास है किसी दूसरे जीव में वैसा नहीं है। अब ये इतना पावरफुल है कि इसे करने के लिए कुछ काम चाहिए जिसमें मस्तिष्क व्यस्त रहे । जब आप दिमाग को कुछ काम नहीं देते, दिमाग को व्यस्त नहीं रखते तो पावरफुल दिमाग खुद से ही कुछ काम करने के लिए ढूंढ लेता है । क्या कभी ऐसा हुआ है कि आप रात में अकेले लेट कर अपनी जिंदगी के बारे में सोच रहे हो और रोना आ गया हो..!!
शायद इसीलिए एक अच्छे चरित्र का निर्माण हजारों बार ठोकर खाने के बाद ही होता है क्योंकि एक सुखी जीवन जीने के लिए इंसान को साधु बनने की नहीं, बल्कि सीधा बनने की जरूरत है। बाकी:- सहारे की आदत नहीं है हर किसी को, मैं हूँ ना, बस ये आवाज़ सुननी होती है बुरे वक्त में…
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

