Thursday, February 26, 2026
Homeदेशबचपन, जवानी और बुढ़ापा सब अपने में है खास और हर उम्र...

बचपन, जवानी और बुढ़ापा सब अपने में है खास और हर उम्र का अपना नया ही है अंदाज

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍🏻✍🏻
सभी के जीवन में जन्म और मृत्यु के बीच में बचपन, जवानी और बुढ़ापा तीन अवस्थाएं आती ही हैं। बचपन विकास, जवानी परिपक्वता और बुढ़ापा क्षय की अवस्थाएं हैं। यह तीनों अवस्थाएं स्वाभाविक हैं । बचपन में हम जीवन जीना सीखते हैं। युवावस्था में जीवन जीते हैं और बुढ़ापे में हम समीक्षा करते हैं कि हमने कैसा जीवन जिया है। बचपन में जो सिखाया जाता है, वहीं सीखते हैं। युवावस्था में ही हम कुछ कर सकते हैं। अच्छी शिक्षा से नये परिवार का निर्माण व पालन पोषण करने के साथ साथ अपने बच्चों को शिक्षित कर उनका उज्जवल भविष्य बना सकते हैं। स्वयं और नयी पीढ़ी को स्वावलंबन की शिक्षा दे सकते हैं। युवावस्था में ही अपने सुविधापूर्ण बुढ़ापे का प्रबंध कर सकते हैं। अगर ये सब नहीं करेंगे तो बुढ़ापे में दुःख और पछतावा के अतिरिक्त कुछ नहीं मिलेगा। बुढ़ापे के अभिशाप को झेलना ही पड़ता है। बुढ़ापा शरीर की दुर्दशा कर डालता है। जवानी में मीलों तक मजे से चलनेवाले पैर बुढ़ापे में थोड़ी दूर चलने पर ही थक जाते हैं और साँस फूलने लगती है।
बुढ़ापा तब भारी लगता है, जब इंसान जवानी में बुढ़ाते के आगमन की पूर्व तैयारी नहीं करता। बुढ़ापे में आपके पास समय उपलब्ध होता है और जिम्मेदारियां शायद कम होती हैं क्योंकि आप बच्चों की पढ़ाई , विवाह आदि की जिम्मेदारियां सामान्य रूप पूरी कर चुके होते हैं। ऐसे में यदि आप अपने समय का सदुपयोग दूसरों की भलाई और अपने अनुभव उनको बताने और उन लोगों की जिंदगी को संवारने में लगाते हैं तो आपको बहुत खुशी और संतोष मिलेगा । इससे आपको अपनी जिंदगी खूबसूरत लगेगी । साथ ही साथ आपको जीने का उद्देश्य भी मिलेगा और जितना सम्भव हो सके, आप समाज के निर्बल सदस्यों की, परिवार की सेवा करें क्योंकि बुढ़ाते में सुखद व सम्मानजनक गरिमा भी इसी आधार पर बनती है । बचपन , जवानी और बुढ़ापा सब अपने में खास है और हर उम्र का अपना नया ही अंदाज है ।
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments