मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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हम सभी का स्वभाव अलग अलग है, इसलिए लोगों का व्यवहार भी हर बार अलग मिलेगा जिसके कारण हम व्यवहार को लेकर सभी के साथ एक जैसा मानदंड नहीं अपना सकते। इसका अर्थ यह नहीं कि अलग-अलग लोगों से व्यवहार करने के लिए हम अपना व्यवहार भी बार बार बदलें, बदल ही नहीं सकते, परंतु हम बात करने का तरीका तो बदल ही सकते हैं। जीवन जीने की दो शैलियां ‘व्यवहार व स्वभाव’ हैं। आमतौर पर लोग व्यवहार में जीते हैं, यही वजह है कि विकास के बाद भी वे मानसिक रूप से असंतुष्ट व अशांत रहते हैं। जबकि स्वभाव में जीने वाले व्यक्ति का विकास होने के साथ ही उसे आत्मसंतुष्टि व शांति भी मिलती है। वर्तमान में कोई भी व्यक्ति किसी एक शैली के साथ नहीं जी सकता।
इंसान के मुख से निकलने वाली भाषा उसके व्यवहार को कभी-कभी परिभाषित करती है, ना कि हमेशा. किसी की भाषा और अंदाज बोलने का थोड़ा गलत होता है, जिसको हम लोग शुरुआत में गलत तरीके से जज करते हैं परंतु बाद में वही इंसान और उसका व्यवहार अच्छा लगने लगता है क्योंकि कभी-कभी मीठी बोली बोल कर इंसान गलत व्यवहार करता है और अजीब सी बातें करने वाला इंसान अच्छा व्यवहार करता है । बहुत अच्छी भाषा बोलने वाला अक्सर स्वभाव से रहस्यमई होता है और कभी-कभी वचन बोलने वाले स्वभाव का बहुत ही नरम होता है और व्यवहार में भी बहुत दया रखता है तो यह हर व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है कि आप किस तरह से अपने व्यवहार अपनी भाषा या अपना स्वभाव लेकर चलते हैं । हमें समय, परिस्थिति और व्यक्ति के हिसाब से अपना व्यवहार चुनना चाहिए। सदैव हां ही नहीं, न कहना भी और मृदु बने रहने के साथ थोड़ा कड़ा व्यवहार भी कभी कभी जरुरी होता है जिसके फलस्वरूप स्वभाव कैसा भी हो, अपना मृदु भाषा के साथ व्यवहार हमेशा सही रखें..।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

