मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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एकाकी जीवनशैली के चलते आज देश में परिवार टूट रहे हैं क्योंकि जिन बच्चों को मां बाप पाल पोस व पढ़ा लिखाकर उनका उज्जवल भविष्य बनाने में सबकुछ न्यौछावर कर देते हैं, वही बच्चे उन्हें बेसहारा छोड़कर बाहर बस जाते हैं। अक्सर महानगरों में यह समस्या विकराल रूप ले रही है। एकाकी जीवनशैली में अधिकतर लोग खुद को ऐसे रिश्तों में जकड़े हुए पाते हैं, जो उन्हें दुखी करते हैं, लेकिन उन्हें खत्म नहीं कर पाते। वर्तमान समय में एकाकी जीवन शैली कुंठा का एक प्रमुख कारण है। जब हमारे आसपास सुख – दुःख बाँटने के लिए कोई नहीं होता तो वहीं से हमारा मन कुंठाग्रस्त होने लगता है।
केवल असफलता ही कुंठा का कारण नहीं होती अपितु वो सफलता भी कुंठा का कारण होती है, जिसमें हमारा कोई अपना प्रशंसा करने वाला नहीं होता है। जिस परिवार में लोग आपसी तालमेल से एक दूसरे के सुख-दुःख में सहभागी होना जानते हैं, वह परिवार हमेशा कुंठा मुक्त, अवसाद मुक्त एवं खुशहाल होता है। अवसाद से बचना है तो परिवार के लोगों और मित्रों के साथ समय व्यतीत कीजिए। एक दूसरे के साथ मिलकर मुस्कुराइए, अपना सुख-दुःख बाँटिए, नहीं तो जीवन में पैसा तो बहुत रहेगा लेकिन प्रसन्नता चली जाएगी….
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

