मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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चाय के साथ खाने वाले बिस्कुट ने जीवन में एक तो सबक सीखा ही दिया कि किसी में ज्यादा डुबोगे तो टूट ही जाओगे क्योंकि दूसरों की छांव में खड़े होकर हम अपनी परछाई खो देते हैं, जबकि अपनी परछाई के लिए हमें खुद ही धूप में खड़ा होना पड़ता है । यह याद रखें कि अपनी जेब कभी खाली मत होने देना, वरना आपके अपने भी आपको पहचानने से इंकार कर देंगे ।
जिंदगी में दो ही व्यक्ति जीवन को नई दिशा देकर जाते हैं, एक वह जो “मौका” देता है और दूसरा वह जो “धोखा” देता है। हमारा घर बदल जाए या हमारा समय बदल जाए, इसका कोई गम नहीं… लेकिन सबसे ज्यादा दुख तब होता है, जब कोई अपना ही बदल जाता है। वैसे जिंदगी में कुछ जख्म ऐसे भी होते हैं, जो कभी भरते नहीं है, बस इंसान अपनी सूझबूझ से उन जख्मों को छुपाने का हुनर सीख जाता है।
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

