Thursday, February 26, 2026
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समय और शब्द दोनों का प्रयोग सावधानी से करें, यह दोनों दोबारा ना आते हैं और ना देते हैं मौका

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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कर्तव्य और वर्तमान हमारे हाथ में हैं, जबकि फल और भविष्य प्रकृति के हाथ में है! समय और शब्द दोनों का प्रयोग सावधानी से करें, ये दोनों दोबारा ना आते हैं और ना मौका देते हैं । जिंदगी कोई प्रतिस्पर्धा या मुकाबला या होड़ नहीं, बल्कि एक यात्रा है और यह हर व्यक्ति की अलग अलग है । इसलिए इस यात्रा को अपनी इच्छा और क्षमता के साथ ही पूरा करने की कोशिश करें। वहीं ”व्यक्तित्व” की भी अपनी वाणी होती है जो “कलम”‘ या “जीभ” के इस्तेमाल के बिना भी लोगों के “अंर्तमन” को छू जाती है !
अकसर हम यह सुनते हैं, पढते हैं कि “धर्म” जोड़ता है, तोड़ता नहीं, परंतु क्या अपने मन, वचन, कर्म से कोई जुड़ता है या कोई टूटता है । यह विषय भी विचारणीय है। जिस तरह हम यह जानते है कि सोच समझकर बोलना एक कला से कम नहीं है, ठीक उसी तरह से किसी का मौन रहना भी किसी साधना से कम नहीं होता है! जो इंसान जितना अच्छा होता है,”प्रकृति” उसे उतनी ही चिंता में रखती है ! इसलिए समय जैसा बनिए और जो कदर ना करे, उसे दोबारा मत मिलिए।
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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