मूकनायक /देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
8 जनवरी 1880
जैसा कि हम सब जानते हैं कि आज 8 जनवरी 2025 है जो की बौद्ध धम्म ध्वज दिवस है। या फिर यूं कहे पंचशील ध्वज या पांच रंगी धम्म ध्वज दिवस। हम सब जानते हैं कि यह ध्वज हम सब की पहचान है, बाबासाहेब अंबेडकर की पहचान है क्योंकि उन्होंने हमें इस ढंग से जोड़ा था।
धम्मचक्र परवर्तन दिवस की शुरुआत डॉ बाबासाहेब अंबेडकर ने की थी। 14 अक्टूबर 1956 में बाबा साहेब ने अपने कुछ अनुयायियों के साथ मिलकर नागपुर में नवयान बौद्ध धर्म को अपनाया था। इसी दिन से हर साल धम्मचक्र परवर्तन दिवस मनाया जाता है। बाबासाहेब ने बौद्ध धम्म को अपना कर हम सब पर बहुत बड़ी कृपा की है कृपा इसलिए कि बौद्ध धम्म में खुद को भगवान समझने का दावा नहीं किया जाता और ना ही इसमें भेदभाव का जिक्र किया जाता है इसकी सबसे बड़ी बात यह है कि यह सब को एक समान समझने का रास्ता दिखाता है और हम सबको सद्भावना के मार्ग पर चलाता है।
हम सब जानते हैं की बौद्ध धम्म को रातों-रात विलुप्त कर दिया गया था या इसका अस्तित्व ही मिटा दिया गया था फिर भी लोग चाह कर बौद्ध धम्म के
अस्तित्व को नहीं मिटा पाए और इसकी जीती जागती तस्वीर हम सब है।
जय भीम नमो बुद्धाय
सबसे पहले बौद्ध धर्म अपनाने वाले और तिरंगा फहराने वाले श्रीलंका में है नागरिक धर्मपाल (1864 से 1933) का अहम योगदान रहा। श्रीलंका में बौद्ध धर्म को राजकीय धर्म का दर्जा प्राप्त है। श्रीलंका की आबादी में 70.2% लोग बौद्ध ही है। और यह हम सबके लिए बहुत ही गर्व की बात है। श्रीलंका में अन्य धर्म का भी पालन किया जाता है हिंदू मुस्लिम और ईसाई धर्म को अभी वहां पर पालन किया जाता है।
आई अब हम जानते हैं कि हमारे बौद्ध धम्म ध्वज में पांच रंग कैसे आए और क्यों आए। अगर हम कहें कि हमारे बौद्ध धर्म में पांच रंग हैं तो इनका अलग-अलग महत्व और अलग-अलग अर्थ है क्योंकि इसमें पांच रंग है इसलिए इसको पंचशील का झंडा भी कहा जाता है।
नीला: नीले रंग का भावार्थ है कि हम सब मिलकर नीले आसमान के नीचे रहते हैं यानी की समानता का और व्यापकता का और सबको समानता का भाव देना यानि कि सबको एक समान समझना जो नीले आसमान के नीचे रहते हैं।
पीला: पीले रंग का भावार्थ है मध्यम मार्ग जो कि हमें चरित्र संपन्न और उत्कृष्ट जीवन जीने का मार्ग बताता है। जैसा कि बाबा बुद्ध ने अष्टांग मार्ग पर चलने का रास्ता दिखाया है।
लाल: लाल रंग को जैसे कि हम इसके रंग से ही बहुत गहराई से देखते हैं यानी कि दर्द निश्चय और गतिशीलता का रंग। यह जीवन को ऊर्जावान बनाए रखना है जन कल्याण के लिए कठिन परिश्रम करना और धर्म की रक्षा के लिए बलिदान देने तक का संदेश देता है।
सफेद: सफेद रंग को जैसा कि हम सब जानते हैं शांति और शुद्धता का प्रतीक। मन कर्म और वचन से हम सबको शुद्ध होना चाहिए । सफेद रंग बाबा बुद्ध के विचारों विचारों की पवित्रताऔर शुद्धता को दर्शाता है।
केसरिया: जैसा कि कैसे रंग से ही पता चलता है कि यह त्याग और बलिदान का प्रतीक है। इसीलिए हम केसरिया को भगवा रंग भी बोलते हैं। इस रंग के लिए न जाने हमारे कितने लोगों ने बलिदान दिया है और हम सबको सुरक्षित जीवन जीने के लिए प्रेरित किया है या हमें वह जीवन दान दिया है यह रंग अपने आप में ही एक बहुत बड़ी पहचान है। इस रंग की पहचान है बलिदान देना शिक्षा प्राप्त करना और ज्ञान के और सच्चाई के मार्ग पर चलना।
पंचशील ध्वज से जुड़े हुए रंगों से कई देश भी जुड़े हुए हैं जिनके बदौलत थी इस झंडे में यह रंग दिए गए हैं जैसे कि नेपाल चीन तिब्बत इंडोनेशिया श्रीलंका और भी न जाने कितने देश हैं जो हमारे बहुत दम से जुड़े हुए हैं यानी कि लगभग 135 देश के आसपास। इसी बात से साबित होता है कि हमारे बौद्ध धर्म को मानने वाले कितनी बड़ी जनसंख्या में लोग हैं।
जय भीम नमो बुद्धाय
विश्व बौद्ध धर्म ध्वजा दिवस की सबको हार्दिक शुभकामनाएं
लेखक: नीलम सोनीपत
सामाजिक चिंतक और जिला ब्यूरो चीफ

