मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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पवित्र हृदय से ही महान कार्य संपन्न हो सकते हैं । इसलिए यदि हमारे जीवन का लक्ष्य श्रेष्ठ है तो हमारे हृदय की भावनायें भी निर्मल होनी चाहिए। गलत मार्ग पर तेज गति से चलने की अपेक्षा धीरे-धीरे ही सही, परंतु उचित मार्ग पर आगे बढ़ते रहना ही हमें एक दिन हमारे लक्ष्य की ऊँचाइयों तक अवश्य पहुँचा देगा।
उचित दिशा में गति ही जीवन की दशा भी बदल देती है । अन्यथा जीवन भर की दौड़ से भी शून्य ही हाथ लगने वाला है। इसलिए जो स्वयं के साथ साथ परहित में भी अच्छा लगे, उसे ग्रहण करो और जो बुरा लगे, उसका त्याग कर दो । फिर चाहे वह विचार हो, कर्म हो या फिर मनुष्य हो…
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

