Thursday, February 26, 2026
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पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को सैकड़ो लोगों ने दी श्रद्धांजलि

मूकनायक /राजस्थान/ हिंडौन
राष्ट्रीय प्रभारी
ओमप्रकाश वर्मा(9001101338)

हिण्डौन सिटी में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की श्रद्धांजलि सभा का आयोजन शहर के डैम्प रोड चौराहे पर किया गया । जिसमें शहर के प्रबुद्ध जनों ने अपने वक्तव्य दिए एवं डॉ मनमोहन सिंह की तस्वीर पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर अपनी कृतज्ञता व्यक्त की । इस दौरान कार्यक्रम स्थल से गुजरने वाले लोगों बच्चों महिलाओं में बढ़ चढ़कर कार्यक्रम में हिस्सा लिया । कार्यक्रम में मुख्य वक्ता हुकमसिंह कश्यप ने बताया कि डॉ मनमोहन सिंह का बचपन का नाम मोहना था, जिनका जन्म वर्तमान के पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चकवाल जिले के गांव में हुआ था । अपने जीवन के 33 साल सियासत में रहने के बाद भी उन्होंने अपनी जमीन से जुड़ा व्यक्तित्व और सादगी नहीं छोड़ी । उनके चेहरे पर हमेशा सौम्या मुस्कान और गंभीर व्यक्तित्व नजर आता था। डॉ सिंह का निधन राष्ट्र के लिए बहुत बड़ी अपूरणीय क्षति है । डॉ मनमोहन सिंह अक्सर कहा करते थे । भविष्य के पीढियां हमारा मूल्यांकन हमारे पास मौजूद कारों की संख्या या हमारे घरों के आकार के आधार पर नहीं करेगी बल्कि इस आधार पर करेगी कि हमने कितने लोगों को गरीबों से बाहर निकाला है । डॉ मनमोहन सिंह के पास केवल एकमात्र कर मारुति 800 थी, वह सन 1950 में स्कॉलरशिप पर कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ने गए । कैंब्रिज यूनिवर्सिटी एवं ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ने के बाद संयुक्त राष्ट्र में भी उन्होंने काम किया और 1969 में भारत आए भारत में रिजर्व बैंक के गवर्नर रहे । भारत सरकार में वित्त मंत्री भी रहे, भारतीय मुद्रा पर डॉ मनमोहन सिंह के हस्ताक्षर अपने जरूर देखे होंगे । डॉ मनमोहन सिंह एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिनके हस्ताक्षर भारतीय मुद्रा पर भी हैं डॉ मनमोहन सिंह ने सपनों का पीछा करना सिखाया था और साबित किया कि कामयाबी केवल विशेष अधिकार हासिल लोगों तक ही सीमित नहीं रह सकती है । मात्र 15 साल की उम्र में सन 1947 में पाकिस्तान छोड़ना पड़ा लेकिन डॉ मनमोहन सिंह ने अपने व्यक्तित्व के दम पर खुद को हर पद पर साबित किया और देश के प्रधानमंत्री जैसा बड़े पद पर रहते हुए कई ऐसे काम किया जो की आज सत्ता में बैठे लोगों के लिए करना असंभव है । डॉ मनमोहन सिंह कहते थे की शिक्षा और कड़ी मेहनत के जरिए हमारी जिंदगी और हमारे माता-पिता की जिंदगी को बेहतर बनाया जा सकता है । डॉ मनमोहन सिंह ने ही भारत से लाइसेंस राज को खत्म किया था और देश में आर्थिक उदारीकरण की नीति लागू कर देश को विकासशील देश बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हर देश के घर-घर में गाड़ी घोड़ा के साथ-साथ जीने की कला में चार चांद लगाए हैं । कार्यक्रम में अग्रवाल समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी रविंद्र जैतवाल ने आमजन को संबोधित करते हुए कहा कि डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल में देश ने बहुत उन्नति की आर्थिक रूप से देश जब बिल्कुल कंगाली की कगार पर था, तब डॉक्टर मनमोहन सिंह ने सोना गिरवी रखकर देश को बर्बाद होने से बचाया और उसे सोने को भी वापस लाकर देश की नाक को सही सलामत रखा । रविंद्र जैतवाल द्वारा डॉ मनमोहन सिंह को भारत रत्न दिए जाने की मांग की, साथ ही उपस्थित जन सैलाब से अनुरोध किया कि डॉ मनमोहन सिंह जी के लिए भारत रत्न दिए जाने की मुहिम शुरू करनी चाहिए । कार्यक्रम में एडवोकेट गोपेंद्र पावटा ने बताया कि डॉ मनमोहन सिंह जी द्वारा देश को सूचना का अधिकार जैसा भ्रष्टाचार को उजागर करने वाला एक कानून जनता को सौंप कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक बहुत बड़ा मूलभूत कदम उठाया था । कार्यक्रम में राजस्थान हाईकोर्ट के एडवोकेट हर्षवर्धन सिंह कश्यप ने बताया कि डॉ मनमोहन सिंह जी की बदौलत ही आज हर व्यक्ति दोपहिया और चौपाइयां वाहन खरीदने का कलेजा रखता है क्योंकि डॉ मनमोहन सिंह जी ने ही वैश्विक कंपनियों के लिए भारत के बाजार के दरवाजे खोलकर देश में उत्पादन क्षमता को बढ़ाया और आर्थिक उदारीकरण के चलते हर व्यक्ति को वाहन एवं तमाम मूलभूत सुविधाएं सहज उपलब्ध हो सकी डॉ मनमोहन सिंह जी ने केवल आर्थिक उदारीकरण किया । बल्कि देश में रोजगार की व्यवस्था के लिए गांव देहात तक मनरेगा जैसी योजना लागू की । जिससे गांव देहात में भी प्रत्येक व्यक्ति को रोजगार उपलब्ध हो सके और देश का आर्थिक संबल बढ़े डॉ मनमोहन सिंह इस बात को बखूबी जानते थे कि सूचना का अधिकार का इस्तेमाल उनकी सरकार के खिलाफ भी किया जा सकता है लेकिन उन्होंने लोकतांत्रिक ढांचे को सुदृढ़ बनाने के लिए लोहे की कलेजा दिखाते हुए सूचना के अधिकार को लागू किया और भ्रष्टाचार को खत्म करने में अहम योगदान दिया । कार्यक्रम में पूर्व अध्यक्ष भगवान सहाय शर्मा, वरिष्ठ कांग्रेसी रविंद्र सिंह बेनीवाल सहित दर्जन लोगों ने अपने वक्तव्य से श्रधांजलि सभा को सम्बोधित किया ।

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