मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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बिना स्वार्थ और बिना मुलाकात के प्रतिदिन याद करने वाले भी सौभाग्य से मिलते हैं। कहते हैं कि तन से सुंदर व्यक्ति भाग्य के कारण होता है और मन से सुंदर अपने सही कर्म के कारण होता है क्योंकि हमारा अस्तित्व हमारे कर्म से है किसी के नजरिए से नहीं । संतोष और उदारता ही जीवन में ख़ुशियाँ लाती हैं।
ये इंसान का भ्रम है कि धन दौलत से जीवन में खुशियाँ आती हैं । बाकी:- जिन्हें ज्ञान है, उन्हें घमंड कैसा और जिन्हें घमंड है, उन्हें ज्ञान कैसा ? याद रखें.. दूसरों की गलतियों से, सीखने में ही बुद्धिमानी है । जिंदगी इतनी बड़ी नहीं, कि सारी गलतियां खुद करके ही सीखा जाये..
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

