मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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प्रकृति ने हमें इतना दिया है, उसका तो धन्यवाद नहीं किया हमने, लेकिन जो नहीं दिया है, उसके लिए हम अन्याय की शिकायत जरूर करते रहते हैं। कभी शांत बैठकर पूरी ईमानदारी के साथ सोचना कि वास्तव में मंदिर परमात्मा के लिए जाते हैं या खुद के लिए । कहते हैं कि बारिश और धूप दोनों के मिलने से ही इंद्रधनुष बनता है । वैसे ही खूबसूरत जिंदगी के लिए सुख और दुख दोनों ही जरूरी होते हैं।
इसलिए दुख और सुख को जीवन में अपनाना भी सीखो, ठुकराना भी सीखो और जहां पर इज्जत नहीं, वहां से उठकर जाना भी सीखो। यही हमारे हित में है । बाकी:- लाड और प्यार एक उम्र तक मुफ्त में मिलता है। उसके बाद उसे खुद ही कमाना पड़ता है…..
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

