मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जिंदगी में जब फैसला लेना मुश्किल हो जाए तो ऐसी स्थिति में अटकने की बजाए तो उस वाक़्यात को पैण्डंग रख कर आगे बढ़ जाना चाहिए क्योंकि फैसला अगर हमारे पक्ष में होता है तो हमें सोचने की जरूरत नहीं होती और मुश्किलात में कभी भी फैसला हमारे हक में नहीं होता । जिंदगी में कुछ फैसले बहुत सख्त होते हैं और यही फैसले जिंदगी का रूख़ बदल देते हैं।
याद रखें, मुँह सिर्फ एक और कान दो हैं, मतलब ये कि हमें बोलना कम और सुनना अधिक चाहिए। इसलिए सच बोलने का साहस कीजिये जिसका परिणाम सकारात्मक ही होगा । वैसे भी कई बार जो दौड़ दौड़ कर भी नहीं मिलता, वहीं बिना दौड़े भी मिल जाता है ! बाकी बहुत समय पड़ा है, यही वहम सबसे बड़ा है। किसी कवि की दो पंक्तियां याद आती है:- हजारों सबक पढ़ें, कुछ भी समझ नहीं पाया, अपनों ने फरेब क्या किया, दुनिया समझ में आ गयी…..
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

