मूकनायक /देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
11 मार्च सन 16 89 को पेशवा ने संभाजी महाराज को खत्म करके शरीर के टुकड़े टुकड़े करके तुला नदी में फेंक दिया था। और कहा गया कि जो भी हाथ लगाएगा उसका भी कत्ल कर दिया जाएगा।
काफी समय बाद एक पहलवान इन्हें हिम्मत दिखाई जिसका नाम गणपत पहलवान था उसने संभाजी महाराज के शरीर के हिस्सों को इकट्ठा किए ,सिलाई की और मुखाग्नि दे दी ।संभाजी की समाधि आज भी महार इलाके में स्थित है। जब पेशवा को पता चला तो महार गणपत पहलवान का कत्ल कर दिया गया।
समूची महार जाति को गांव के बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी ।और कमर पर झाड़ू और गले में मटका का फरमान जारी कर दिया। और झूठी अफवाह फैला दी की महार पहलवान गणपत देव तुल्य हो गया यानी भगवान को भेंट चढ़ गया।
पेशवा ने अत्याचार करने शुरू कर दिए ।महार मार्शल जाती पर सेना पर लड़ने पर रोक लगा दी। झूल्म से तंग आकर अपने स्वाभिमान और अधिकार की खातिर आंदोलन की सूची जा रही थी। उसी समय अंग्रेजों का आगमन हुआ । पेशवा पर विजय प्राप्त नहीं की जा सकती थी । महार जाति का एक नवयुवक सिद्धनाथ पहले पेशवाओं से मिला और बोला अगर तुम हमारे सारे अधिकार और सम्मान लौटा दो तो अंग्रेजों को यहां से भगा देंगे। पेशवा ने कहा कि हम तुम्हें 1 इंच भूमि यानी सुई के बराबर जगह भी नहीं देंगे ।
सिद्धनाथ ने चेतावनी दी कि तुम्हें अपनी मृत्यु को स्वयं ही निमंत्रण दे दिया है ।तुम्हें कोई नहीं बचा सकता ।फिर सिद्धनाथ अंग्रेजों से मिला और कहा कि तुम हमें हमारे अधिकार और सम्मान लौटा दो तो हम पेशवा से लड़ने को तैयार है। तब सिद्धनाथ 500 महार सैनिकों के साथ संभाजी महाराज की समाधि पर नमन करते हुए शपथ लेता है कि हम संभाजी महाराज के खून का बदला जरूर लेंगे ।तब जाकर भीमा कोरेगांव की लड़ाई हुई जिसमें 500 महार सैनिकों ने 28000 पेशवा का कत्ल गाजर मूली की तरह कर दिया था ।जो आप मेरे कल के सुविचार मैं पढ़ चुके हैं।
बाबासाहेब डॉक्टर अंबेडकर ने स्वयं जाकर कर इन महान वीरों के लिए आंसू बहाए । और 1 जनवरी को बाबासाहेब भीमा कोरेगांव जरूर जाते थे ।और उन वीर महार सैनिकों को जाकर नमन करते थे।
लेखक: मोती राम MA
पूर्व अधिकारी
SHAHDARA
9910160521

