मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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एक सच्चा मित्र अगर सौ बार रूठे तो उसे हर बार मना लेना चाहिए क्योंकि कीमती मोतियों की माला जितनी बार भी टूटती है, उसे हर बार पिरोना ही पड़ता है ! रिश्तों को कभी दौलत की निगाह से मत देखना क्योंकि रिश्ते निभाने के लिए इंसान में सकारात्मक सोच, अच्छे संस्कार और आदर की भावना का होना अति आवश्यक है।
सच्चा स्नेह करने वाला केवल आपको बुरा बोल सकता है…”कभी आपका बुरा नहीं कर सकता” क्योंकि उसकी नाराजगी में आपकी फिक्र और दिल में आपके प्रति सच्चा स्नेह होता है !! हमेशा याद रखिए, अपमान का बदला लड़ाई करके नहीं, सामने वाले व्यक्ति से ज्यादा सफल बनकर बदला लिया जाता है ।
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

