Thursday, February 26, 2026
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6 दिसंबर बाबा साहब डॉ. अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि

मूकनायक) देश

*राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा*

भारत का संविधान के निर्माता समाज सुधारक डॉ आंबेडकर जी ने 6 दिसंबर 1956 को अंतिम सांस ली थी। जो कि हम के लिए बहुत ही दुख की बात है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि वो महिलाओं और शूद्रों के महाविनायक थे। वो दलित वर्ग को अपनी पूरी जिंदगी नयाय दिलाने में संघर्ष करते रहे। वो हमारे समाज के लिए मसीहा थे। उन्होंने हमारे देश के लिए संविधान को लिखित रूप दिया।
आज (6 दिसंबर 2024 )को उनका 69 वीं परिनिर्वाण दिवस पर पूरे देश में श्रद्धांजलि अर्पित की जाती हैं। इस दिन को बाबा साहिब के महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है।

करोड़ों लोगों के मसीहा कहे जाने वाले बाबा साहेब को सिंबल ऑफ नॉलेज, संविधान निर्माता और भारत रत्न से नवाजा गया गया है। बाबा साहिब के अनुसार समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे का समाज होना चाहिए। इसी मकसद को रखते हुए उन्होंने मौलिक अधिकारों की रचना की है।

अगर हम समानता और स्वतंत्रता की बात करें तो इसी बात को ध्यान में रखकर उन्होंने काफी धर्मों की पहचान की और फिर अपने अंतिम दिनों से पहले ही उन्होंने बौद्ध धम्म को अपनाया था। बाबा साहेब ने बताया था कि मैं हिन्दू पैदा हुआ था पर हिन्दू धर्म में मरूंगा नहीं।

बाबा साहिब ने हमारे लिए अपने बीवी और 4 बच्चें तक कुर्बान कर दिए। हमारे लिए खुद उन्होंने कष्टों के दिन गुजारें। उनके इन महान कर्मों का हम कभी भी ऋण नहीं चुका सकते हैं।हम सब उनके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम करते हैं और उन्हें नम आंखों से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

जय भीम जय संविधान

लेखक:सामाजिक चिंतक, ब्यूरो चीफ सोनीपत मूकनायक, नीलम आम्बेडकर

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