Thursday, February 26, 2026
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21 वीं सदी में रूढ़िवादी प्रथाओं में जकड़ी महिलाओं की स्थिति

मूकनायक /देश

राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा

आज की 21वीं सदी में रूढ़िवादी प्रथाओं मै जकड़ी महिलाएं
महिलाओं की स्थिति आज की जमाने में जितनी अच्छी है उतनी अच्छी कभी नहीं रही है जब हमारा देश भारत सोने की चिड़िया कहलाता था उसे समय भी महिलाओं के लिए कई तरह की पाबंदियां थी वह आश्रम में नहीं जा सकते थे उनको लड़कों के बराबर शिक्षा भी नहीं दी जाती थी घर के अंदर ही उनकी शिक्षा पूरी हुआ करती थी और जो अच्छे परिवार थे केवल वही अपने लड़कियों के लिए घर के अंदर शिक्षा का प्रबंध कर पाते थे बाकी सभी के लिए शिक्षा नहीं मिलते थे समाज केवल और केवल लड़कियों के पाबंदी पर ही हमेशा से सख्त रहा है और आज भी है बस बाबा साहब के आने पर शिक्षा का अधिकार दिया गया सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा के द्वार खोल इसलिए उन्हें हम शिक्षा के देवी कहते हैं क्योंकि अगर सावित्रीबाई फूले नहीं होती तो महिला को शिक्षा भी नहीं मिलती बाबा साहब ने जो संविधान में अधिकार दिए थे उनको भी कई तरीकों से दवा दिया जाता था आज उन सारी बेड़ियों से महिलाएं आजाद हैं लेकिन पूरी तरह नहीं आज भी गांव में महिलाओं के ऊपर घूंघट प्रथा और जाति प्रथा छुआछूत और भी कई तरीके के नियम लागू होते हैं महिलाओं को अगर अपना जो सर उठाने का मौका दिया गया है उसमें बाबा साहब का लिखा हुआ संविधान सर्वोत्तम स्थान रखता है उनके द्वारा लिखा गया है कि महिलाए शिक्षा की अधिकारी हैं वह अपने पैरों पर खडी हो सकती है जिस प्रकार उन्हें मतदान देने का अधिकार है उसी प्रकार में शिक्षा का भी अधिकार है और समाज में अपना अस्तित्व बनाने का भी अधिकार है आज के इस पाखंडी समाज मैं तो महिलाओं को स्वयं भी अपनी बेड़ियों को उतार फेक देना चाहिए पर समाज की बंदिशे ऐसा करने नहीं देती है जिससे महिलाएं जो कुछ भी करना चाहती है वो करने में सफल नहीं हो पाती है ऐसा भी देखा गया है कि एक महिला किसी तरह कड़ी मेहनत करके सरकारी नौकरी भी हासिल के लेती पर जो रूढ़ि वादी प्रथाएं उनको भी लेकर चलना पड़ता है जब तक ऐसी प्रथाओं को झोड़ा नहीं जाएगा तब तक महिला समाज का स्वतंत्र होकर जीवन यापन करना बहुत ही मुश्किल है और इस प्रकार का यदि महिला स्वतंत्र जीवन चाहती है तो स्वयं ही समाज की रूढ़िवादी प्रथा को तोड़ कर आगे आए खुद पर भरोसा करे और स्वतंत्रता के साथ जीवन जिए।
लेखक :
सामाजिक चिंतक
संध्यारमेश
सागर संभाग प्रभारी मूकनायक

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