मूकनायक /देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
दलित वर्ग संघ दिल्ली के अध्यक्ष भगत अमीनचंद आ गए। वह झुक सफेद रंग का कढ़ाईदार कुर्ता, चूड़ीदार पाजामा, सदरी और गांधी टोपी में सजे-संवर करीब 6 फुट लंबे, सुगठित व मजबूत कद-काठी वाले व्यक्ति थे। उन्होंने आकर डॉ. आंबेडकर के चरण-स्पर्श किए, एक क्षण खड़े रहे और फिर एक कुर्सी पर बैठ गए। बाबा साहेब ने आने का कारण पूछा। उन्होंने कहा कि सर, मैं यहां आपके दर्शनार्थ और आपका आशीर्वाद लेने आया हूँ। कोई और काम नहीं है। 🗣️ बाबा साहेब ने मुस्कराते हुए कहा, “आशीर्वाद तो तुम्हें पहले ही काफी मिल चुका है। अब और अधिक क्या देना है। तुम लोग बिना काम के यहां आ जाते हो और मेरा समय बर्बाद करते हो तुम्हें कुछ और भी कहना हो तो जल्दी कहो।
भगत अमीनचंद मुस्कराए और जबाब दिया, “बाबा साहेब, हम दलित लोग आपकी मेहनत, जीवन पर्यंत संघर्ष और त्याग का फल चख रहे हैं और हमेशा आपके ऋणी और आभारी रहेंगे, लेकिन सर, आप कांग्रेस, उसके नेताओं और नीतियों की जितनी आलोचना करते हैं और उन्हें गरियाते हैं, हमें उतना ही लाभ प्राप्त होता है। हम बस कुछ बयान जारी कर देते हैं और आपके खिलाफ कुछ कह देते हैं। इसके बाद तो हमें ढेर सारे लाभ मिलते हैं। हमारा और अधिक ध्यान रखा जाता है और देखभाल होती है, छद्मवेश में वरदान, सभी लाभ, बेहतर सौदेबाजी, आराम और मजे, सब कुछ अपने आप प्रचुर मात्रा में मिल जाता है। हमें कहीं मांगने नहीं जाना पड़ता सर, आपके आशीर्वाद से हमारे दिन बहुरे हैं। हम जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़े हैं। हमारे प्रिय बाबा साहेब को बहुत-बहुत धन्यवाद”
😡😡
😀 डॉ. आंबेडकर ने चश्मे से उन्हें ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर तक घूरा।
अपने ढंग से जो कुछ कहा था, उसे सुनकर वह मुस्कराए और फिर जोर से हंसे।*
बोले, “ठीक है, अपनी चेतना पर अंकुश लगाकर अपनी राह चलते रहो कांग्रेस पार्टी व हिंदुओं द्वारा (अब बीजेपी भी) प्राप्त लाभों का आनंद उठाते रहो, पर अपने हितचिंतकों को भूलना नहीं। वे आपको रोटी देते हैं, कुत्ते की तरह, जैसे बचा हुआ खाना दूर से डाल दिया जाता है और उसे चाटते हुए वह अपने मालिक को भूलता नहीं और कृतज्ञता से दुम हिलाता रहता है।”
संदर्भ:- डॉ आंबेडकर के अंतिम कुछ वर्ष, पेज 119 (नानकचंद रत्तू)
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:- ए पी सिंह निरिस्सरो
जय भीम जय भारत जय संविधान

