मूकनायक /देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
विश्वरतन डॉ भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू मध्यप्रदेश में हुआ था
बाबा साहब के बचपन का नाम “भीवा”था
इनकी माता का नाम भीमा बाई मुरबादकर व
पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल था
बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने अन्तिम सांस 6 दिसम्बर 1956 को दिल्ली मे ली थी
डॉ भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है
क्योंकि हिंदू धर्म में व्याप्त कुरीतियों और छुआछूत की प्रथा से तंग आकर सन 1956 में उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया था
महापरिनिर्वाण दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य – डॉ अंबेडकर का योगदान व उपलब्धियों को याद करना
महापरिनिर्वाण शब्द का अर्थ -: मुक्ति या अंतिम मृत्यु
बौद्ध धर्म में परीनिर्वाण का मतलब – मृत्यु के बाद निर्वाण प्राप्त करना या शरीर से आत्मा का मुक्त होना
बौद्ध धर्म में परीनिर्वाण प्राप्त करने वाले व्यक्ति को सांसारिक इच्छाओं और जीवन की पीड़ा से मुक्ति मिलती है
बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर एक सम्मानित बौद्ध नेता थे
सन 1954 में नेपाल के काठमांडू में आयोजित जगतिक बौद्ध धर्म परिषद में उन्हें बौद्ध भिक्षुओं द्वारा उन्हें “बौधिसत्व” की उपाधि से सम्मानित किया गया
डॉ भीमराव अंबेडकर अपने-अपने कार्यों से निर्वाण प्राप्त कर चुके थे इसलिए उनकी पुण्यतिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है
वह एक भारतीय विधिवेता अर्थशास्त्री समाज सुधारक और राजनीतिक लेखक बहु भाषा विद्वान एवं एक महान विचारक थे बाबा साहब ने संविधान सभा में चर्चा के आधार पर भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया
बाबा साहब को मरणोपरांत सन 1990 में “भारत रत्न”से सम्मानित किया गया था
डॉ भीमराव अंबेडकर के बारे में कुछ खास बातें -:
- वे भारत के पहले कानून मंत्री थे ।
- वे भारतीय संविधान की मसौदा समिति के अध्यक्ष थे।
- उन्हें “भारतीय संविधान का जनक” कहा जाता है ।
- उन्होंने दलितों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई इसलिए उन्हें “दलित एवं पिछड़ों का मसीहा” कहा जाता है।
- उन्होंने बहिष्कृत भारत, मूकनायक, जनता , प्रबुद्ध भारत जैसे समाचार पत्र निकाले ।
- बाबा साहब एक समाज सुधारक, विधिवेता,अर्थशास्त्री,लेखक,बहु भाषाविद, मुखर वक्ता, विद्वान और धर्मो के विचारक थे।
लेखक: राकेश बैरवा जिला ब्यूरो चीफ बूंदी

