मूकनायक/ देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
बहुजन समाज पार्टी द्वारा देश भर में बाबा साहेब डॉअकर आंबेडकर जन्म शताब्दी वर्ष के तहत मनाए गए समारोहों की श्रृंखला में 18 सितम्बर 1990 के दिन चंडीगढ़ के सेक्टर 17 (परेड ग्राउंड) में पंजाब स्तर पर एक विशाल सम्मेलन में मान्यवर कांशी राम जी द्वारा दिए गए भाषण के कुछ प्रमुख अंशः
मान्यवर कांशी राम जी ने उपस्थित लाखों की भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा था कि आज हम इस मैदान में पहली बार नहीं, बल्कि आज से 9 साल पहले 18 अक्टूबर 1981 के दिन तब इकट्ठे हुए थे जब हम दलित-शोषित-समाज के कर्मचारियों को इकट्ठा कर रहे थे। क्योंकि इनके पास टाईम, टेलेन्ट, ट्रेज़री हैं। ताकि वे लोग अपने भोले-भाले समाज की मदद करे और उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करे। आज 9 साल पहले सोचा सपना, वह इरादा उसी मैदान में पूरा होता नजर आ रहा हैं। डेढ़-दो लाख कर्मचारी मैंने इकट्ठे किए हैं जिनकी जड़ें समाज से जुड़ी हैं।
उन्होंने आगे कहा कि हमें सब्र भी रखना होगा। कुछ बेसब्र लोग भी होते हैं। जिस तरह कुछ लोग 1981 में, 9 साल पहले, इसी मैदान में हमारे साथ इकट्ठा हुए थे, परन्तु जिन्होंने सब्र नहीं रखा, वे तीन-चार साल में ही निराश होकर अलग-थलग हो गए, और मिट्टी में मिल गए। और जिन्होंने सब्र रखा, आज भी वे हमारे साथ हैं, उनका हौसला बढ़ा हुआ हैं।
अपना धन-बुद्धि उपयोग कर के आप इकट्ठे हुए हैं, इससे हमारा हौसला बढ़ा है। और विरोधी पार्टियों का हौसला गिरता नज़र आ रहा है। साहेब ने आगे कहा कि हमें अपनी तैयारी से ही संसद में जाना है, देवी लाल मुझसे कई बार मिला, और वी. पी. सिंह भी मिला और (उन्होंने) कहा कि आपका र्पालीयामेंट में जाना बहुत जरूरी है।
जब राजीव गाँधी ने यह सुना तो वह मेरे पास आया और कहा कि बाबूजी हमें भी आपकी सेवा करने का मौका दो, तां कि हम भी आपकी कोई मदद करके आपको सांसद बना के संदन में भेज दे। तब मैंने उससे कहा कि आज तक आप मुझे नहीं समझ पाए, क्योंकि आपकी मदद से मैं संसद में जाऊँगा तो अपने समाज के कुछ काम नहीं आ सकूँगा।
आपकी मदद से, आपके टुकड़ों पर पलने वाले गए-गुजरे 125 आदमी आरक्षित सीटों से जीत कर गए संसद में हमेशा नज़र आते हैं। वे किसी काम के आदमी (सांसद) नहीं लगते।
इसलिए हम अपने समाज को तैयार कर रहे हैं, जिसे आपने लाचार और ललुआ (मजबूर) समाज बना दिया हैं। जब यह समाज तैयार हो जाएगा, तब उनकी तैयारी से मैं संसद जाऊँगा। जब तक यह मुमकिन नहीं है, तब तक संसद में जाकर बंद नहीं होना चाहता।
यदि संसद के अन्दर आपके सांसदों की भीड़ कम है तो जुल्म के खिलाफ आप लोग सड़कों पर इतनी भीड़ इकॅट्ठी कर लो कि संसद की जड़ें तक हिल जाएँ- साहेब कांशी राम।
प्रस्तुत करते है।
इंजीनियर तेजपाल सिंह
94177-94756
जुॅग पलटाऊ बहुजन महानायक
पुस्तक मैं कांशीराम बोलता हूं।
लेखक-पम्मी लालो मजारा
95011-43755

