मूकनायक/ देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
👉 बात है फरवरी 2002 की।
महाराष्ट्र के शहर सोलापुर के एक गेस्ट हाउस में साहिब कांशीराम जी की एक मीटिंग चल रही थी।
👨🦰इस दौरान 20-25 के करीब आई.पी.एस., आई.ए.एस. और आई.एफ.एस. अफसर साहिब को मिलने पहुँच गए।
💎 साहिब ने डॉ सुरेश माने को कहा कि’ इन्हें कहो कि बाहर बरामदे में बैठकर इंतज़ार करें, मुझे अभी आधा घंटा लगेगा।’
💎 इसके 15 मिनट बाद ही सोलापुर रेलवे स्टेशन के करीब 30-40 कुली भी मिलने आ पहुँचे। साहिब ने उन्हें भी इंतज़ार करने के लिए कहा।
👉 जब आधा घंटा हुआ तो साहिब ने डॉ माने को कहा, ‘बाहर जो लोग मिलने के लिए बैठे हैं, उन्हें बुलाइए।
🗣️ डॉ. माने ने कहा, ‘साहिब जी, पहले किसे बुलाऊँ? कुलियों को या ब्यूरोक्रेट्स को ?
💎💎 मान्यवर साहिब ने कहा, ‘पहले कुलियों को बुलाओ। वह मजदूर लोग हैं। वे कौन सा कोई वेतन लेते हैं। काम करते हैं, मजदूरी करते हैं तब जाकर अपना परिवार पालते हैं।’
💎 बहरहाल, एक एक करके सभी कुली अन्दर आ गए और आदरभाव से साहिब के चरण स्पर्श करके एक साथ खड़े हो गए। उस समय साहिब के साथ केरल के कर्नल विश्वनाथन भी बैठे हुए थे।
💎💎 कांशीराम साहिब ने कुली लोगों को सवाल किया, ‘मैं गरीब हूँ, बेकार हूँ, फिर आप लोग मुझे क्यों मिलने आये हो? “एक कुली ने कहा, ‘ साहिब आप हमारे समाज के लिए लड़ रहे हो, दिन रात मर-मर कर काम कर रहे हो, आप हमारे समाज को संवारना चाहते हो, समाज का उत्थान करना चाहते हो इसलिए हम लोग भी अपने खून-पसीने की कमाई का कुछ पैसा इकठ्ठा करके आपको देने आये हैं।’
💎 साहिब ने पुछा, ‘कितना पैसा है?’
🗣️ कुली बोले – साहिब जी, 25000 रुपये हैं।’
💎 साहिब ने उन कुली लोगों का अभिवादन करते हुए कहा, ‘ठीक है।’
🤝 फिर साहिब ने सभी कुलियों से हाथ मिलाया और उन्हें सम्मान पूर्वक विदा किया।
👉 फिर डॉ माने ने उन ब्यूरोक्रेट्स को भीतर बुलाया। वे भीतर आये और दुआ सलाम की।
💎 साहिब ने आने का कारण पूछने पर वे कहने लगे, साहिब जी, वाजपाई सरकार ने हमें बहुत परेशान कर रखा है। हमें परमोशन नहीं दे रही। हमारे ऊपर झूठे केस फाइल किये जा रहे हैं। हमें हर तरह से टार्चर किये जा रहा है। हमारी ज़िन्दगी नरक बनी हुई है। साहिब जी, कृपया हमारी समस्याओं को पार्लियामेंट में उठाइये।’
😡 साहिब ने उन ब्यूरोक्रेट्स को गुस्से में बोलना शुरू किया, ‘आप लोगों ने देखा कि आपसे पहले मुझे लाल कपड़े वाले यानि कुछ कुली लोग मिलने आये थे। वह आये बाद में थे लेकिन मैंने उनको बुलाया आपसे पहले। उनको आपसे पहले इसलिए बुलाया था क्योंकि उन्हें वापिस जाकर उन लोगों ने फिर से मजदूरी करनी है। वो लोग मजदूरी करेंगे तो अपना परिवार पालेंगे।
😡 आप लोग इधर कितना टाइम भी बैठे रहो, आपको कोई फर्क नहीं पड़ेगा और न ही आपकी तन्खाह से कोई कटौती ही होगी। आप मेरे पास अपनी समस्याएँ लेकर आये हो।
👉 कुली लोग मुझे कुछ देने के लिए आये थे। इसलिए कि मैं अपने समाज के लिए लड़ रहा हूँ, और एक एक पल मर मर कर काम करता हूँ। मजदूरी करने वाले लोग मुझे अपने खून-पसीने की कमाई से मदद कर रहे हैं। समाज को संवारने के लिए समाज की बात आगे बढ़ने के लिए।
😡 और इधर आप लोग लाखों रुपये वेतन लेते हो। फिर भी आप लोगों से किसी प्रकार सहायता की उम्मीद नहीं रखता हूँ।
💎 मुझे जरुरत पड़ेगी, तो मैं मजदूर लोगों से पैसा मागूंगा और वे मुझे हंसकर मदद देंगे भी।
😡 आपको सिर्फ अपना हक चाहिए, अपनी बीवी के लिए और अपने बच्चों के लिए। बताओ मुझे, आज तक आपने अपने समाज के लिए क्या किया है?
😥😥 इसीलिए बाबा साहब डॉ आंबेडकर ने आगरा में रोते हुए कहा था कि ‘मैंने रिजर्वेशन के द्वारा अपने समाज के बहुत से लोगों को नौकरी दिलाई लेकिन उन लोगों ने समाज का कुछ भी भला नहीं किया। और उन पढ़े-लिखे अफसरों ने ही मेरे समाज को धोखा दिया।”
😡😡 साहिब ने आखिर नाराज़ होकर और भी कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, ‘आप जाइए और अपना काम कीजिये। अपने आपको देखिये, अपनी नौकरी सेफ रखिये, अपना परिवार और अपने का फिक्र कीजिये।
💎 समाज की फ़िक्र करने के लिए मैं अकेला ही काफी हूँ।
😡😡😡😡😡😡😡😡
:- बोधिसत्व साहब कांशीराम
सन्दर्भ पुस्तक:
मैं कांशीराम बोल रहा हूँ….294
🙏🙏🙏🅰️🅿️ निरिस्सरो
जय भीम जय कांशीराम
जय भारत जय संविधान

