मूकनायक/ देश
*राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा*
मेरे सवाल हुकूमत से हजार थे ? उत्तर में उसके पास केवल मंदिर और मजार थे?
ईमानदारी से देखा जाए तो यह बात साफ हो जाती हैं कि हमारे देश की केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों ने वर्तमान समय में देश का माहौल कैसा बना दिया हैं। देश में बेरोजगारी चरम पर है और सरकार व्दारा भारत की एक बहुत बड़ी आबादी को पांच किलो राशन देकर उसकी बेरोजगारी, भूखमरी व गरीबी का मजाक बनाकर हास्य पर ला खड़ा कर दिया हैं। सरकार का काम देश में वैज्ञानिक सोच को बनाया जायें। लेकिन केन्द्र सरकार ने भारत देश को आस्थावान देश बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यहां तक शिक्षा को भी विज्ञान विरोधी बनाया जाने की कोशिश की गई। विश्वविद्यालय व स्कूलों में कर्मकांड की पढ़ाई को उचित ठहराने वाले सरकारी दस्तावेज दिनों दिन बढ़ते जा रहे है। वास्तव में भारतीय शिक्षा पद्घति विज्ञान और धर्म की अवधारणाओं के बीच झूल रही हैं। राजस्थान सरकार का हाल ही में स्कूलों में कृष्ण भोग इसका जीता-जागता ताजा उदाहरण हैं। भारत का सकल घरेलू उत्पाद केवल 3% दर विकास कर रहा हैं जो कि शर्मनाक है। हम लोग अभूतपूर्व मंदी के दौर से गुजर रहे है जिसके बारे में अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़े भी हमे सतर्क कर रहे है। प्रधानमंत्री मोदी 2 करोड़ रोजगार का वादा करके एक करोड़ लोगों का रोजगार छिन गये। सच में शान्ति प्रिय देश को मोदी सरकार गृह युद्ध जैसे माहौल की ओर लेकर जा रहे है।
मोदी सरकार के व्दारा राष्ट्रीय सम्पत्तियों जैसे विमान सेवा, रेलवे, दूरसंचार, स्टेडियम, बीमा, राजमार्ग, बन्दरगाह आदि की लूट का अड्डा बनाकर रख दिया है। पूंजीपतियों के करोड़ो रूपये के बैंक कर्ज को माफ कर मोदी सरकार पूंजीवादी लोगों की सरकार बन चुकी है। पिछले 10-12 वर्षो में, हमने सार्वजनिक और सामाजिक जीवन के सभी क्षेत्रों में निरन्तर असंतोष देखा है।
➖ पिछले 7 दशकों में भारतीयों के खून और पसीने से बनी सम्पत्तियों को बेचना क्यों चाहते हो ? ➖
➖ भारत के लोगों के खून और पसीने से बनाई गई सार्वजनिक सम्पत्तियों के प्रभावी स्वामित्व को, मोदीजी के मुट्ठी भर करीबी दोस्तों को हस्तांतरिक करने की योजना से भारत सरकार का स्वामित्व चन्द कागज के टुकड़े पर सीमित हो जाएगा। क्या मोदी सरकार यही चाहती है ? ➖
➖ हमारी राष्ट्रीय सम्पत्तियों को छह लाख करोड़ में बेचने का मोदी सरकार का फैसला चौंकाने वाला है? क्योंकि मोदी सरकार ने भारत की हर सार्वजनिक सम्पत्ति को इस सूची में जोड़ दिया है? 27,000 किलोमीटर राजमार्ग से लेकर, 6,000 मेगावॉट बिजली उत्पादन और 28,000 किलोमीटर बिजली पारेषण लाइनों से 8,000 किलोमीटर गैस पाइपलाइन तक, 210 लाख मैट्रिक टन खाद्यान्न भंडारण से 2.86 लाख किलोमीटर दूरसंचार फाइबर ऑप्टिक तक, 15,000 दूरसंचार टावरों से 25 हवाई अड्डों तथा 9 बन्दरगाह तक, 761 खनन ब्लॉक से 2 राष्ट्रीय स्टेडियम और 1.52लाख करोड़ रुपए की रेलवे की सम्पत्तियों तक सूची में शामिल है।? ➖
➖ भारत के सबसे अहम IAS के पदों को भी बिना UPSC परीक्षा दिये ही भरना। क्या लाजिमी है मोदी सरकार? केन्द्र सरकार ने अपने 12 विभागों में जाॅइंट सेक्रेट्री, डायरेक्टर और डिप्टी सेक्रेट्री जैसे पद निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को अनुबंध के आधार पर भर्ती करने का फैसला मई 2023 में लिया गया था। केंद्र सरकार ने कार्मिक एवम् प्रशिक्षण विभाग ने संघ लोक सेवा आयोग को 12 सरकारी विभागों व मंत्रालय में लेटरल एंट्री (सरकारी विभागों में निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की भर्ती) के माध्यम से भर्ती करने का आग्रह किया था। ➖
➖ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को दिए गए आरक्षण में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को शामिल क्यो नहीं किया गया ? 124वाँ संविधान संशोधन विधेयक 9 जनवरी, 2019 को संसद ने अनुच्छेद 368 संविधान संशोधन के अनुसार दो तिहाई बहुमत से पास हुआ, जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश एवम् नियोजन या नियुक्ति में 10 प्रतिशत आरक्षण का उपबंध किया गया है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग/ Economically Weaker Sections (EWS) के निम्नलिखित अभ्यार्थियों को ही आरक्षण का लाभ मिलेगा जिनके- परिवार की सकल वार्षिक आय 8 लाख से कम हो, जिनके पास 5 एकड़ से कम कृषि भूमि हो, 1000 वर्ग फीट से कम का घर, अधिसूचित नगरीय क्षेत्र में 100 गज से कम का घर, गैर अधिसूचित नगरीय क्षेत्र में 200 गज से कम का घर हो। क्या मोदी सरकार sc st obc के लोगो को 3 लाख रुपए से अधिक वार्षिक आय पर छात्रवृत्ति प्रदान की जाति है? जबकि सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार की नीतिगत कमियों की वजह से निचला तबका बहुत बेहाल है।➖
देश में गरीबी और बेरोजगारी ने बहुत विकराल रूप ले लिया है। केन्द्र सरकार हजारो-करोड़ों रूपये दीये जलाने व धर्म के नाम पर पानी की तरह बाये जा रहे है। जिससे भारत विश्व का सबसे बड़ा आस्थावान राष्ट्र बन रहा है। देश के ऊपर कोई भी धर्म नहीं थोपा जाय। कोई भी राष्ट्र धर्म के नाम पर बखेड़ा खड़ा नहीं किया जा सकता है क्योकि ऐसे करना राष्ट्र की प्रगति में बाधा डालती है। सरकार आज विश्व के सबसे प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा साहब की दरगाह अजमेर की खुदाई करने का फरमान दे रही है जो बिल्कुल गलत है। मेरे सवाल हुकूमत से हजार थे ? उत्तर में उसके पास केवल मंदिर और मजार थे ?
लेखक:
एडवोकेट कमल भट्ट रैगर
प्रदेशाध्यक्ष राष्ट्रीय शोषित परिषद राजस्थान स्टेट यूनिट
7297809826

