मूकनायक /देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
जिस इंसान ने जीवन भर
कष्ट सहे। नौकरी पर होने के बावजूद किराए का कमरा ना मिलना ।चपरासी का भी फाइल फेंक कर देना।
जो पहले और अंत तक भारतीय रहा ।आधुनिक भारत का निर्माता। विश्व रतन सविधान निर्माता। समाज सुधारक ।युगपुरुष ।जो करोड़ों वंचित, शोषित ,दलितों ,पिछड़ों और आदिवासियों का मसीहा रहा हो।
लेकिन जिस मसीहा के ना होने पर पूरा देश थम गया। हर कोई उनकी झलक पाने के लिए उत्सुक था ।सभी की आंखें नम थी ।लाखों की संख्या में हुजूम। ऐसा नजारा कहीं नहीं देखा था।
जहां राजभवन मोन था। संसद मौन थी। राष्ट्रपति मोन था। करोड़ों लोग दुख भरे आंसुओं से विलाप कर रहे थे ।मुंबई की सड़कों पर पैर रखने की जगह नहीं बची थी।
यह सब नजारा था 6 दिसंबर 1956 बाबासाहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस था। जो सबसे पहले और अंत तक भारतीय थे।
बाबासाहेब अंबेडकर जी का अपने लोगों को आखिरी संदेश इस प्रकार है,,,
मैं अपने लोगों को अपने जीवन काल में शासक वर्ग के रुप में देखना चाहता था ।मैं यह भी देखना चाहता था कि दबे कुचले वर्ग से ही कोई इंसान आगे आए । और मेरे मिशन को आगे बढ़ाने के लिए अपने ऊपर उत्तरदायित्व ले ।जिस कारवां को आप देख रहे हैं उसे में अनेक मुसीबत और कठिनाइयों से लेकर यहां तक लेकर आया हूं। मुसीबतें आपके सामने आएंगी। कठिनाई भी आएंगी। लेकिन आप हिम्मत नहीं हारना ।कारवां को आगे नहीं बढ़ा सकते तो यहीं पर छोड़ देना। लेकिन किसी भी परिस्थिति में इस कारवां को पीछे ना हटने देना।
आज भी 6 दिसंबर है। बाबासाहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस पर कोटि-कोटि नमन ।और सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी की संविधान की रक्षा के लिए उनके अधूरे कार्यों को पूरा करें। संविधान ही सभी समस्या का समाधान है। संविधान ही जीवन है ।
लेखक: सामाजिक चिंतक,मोती राम MA
SHAHDARA
9910160521

