मूकनायक राजस्थान अजमेर हेमन्त कुमार जाटवा सराना
# लगभग 70 किलोमीटर रेल मार्ग में पुष्कर क्षेत्र के गोयला , नांद , जसवंतपुरा सहित अन्य गांवों की जमीन की जाएगी अवाप्त •••
आखिर कई सालो के लंबे इंतजार के बाद भारत सरकार के रेल मंत्रालय ने पुष्कर मेड़ता रेल मार्ग की सुध लेकर इस मार्ग में आने वाले गांवों की जमीन अवाप्त किए जाने की प्रक्रिया शुरू कर ही दी । पुष्कर से मेड़ता तक लगभग 70 किलोमीटर के इस रेल मार्ग में आने वाले ग्रामीण इलाको सहित कस्बों के लिए आज रेल मंत्रालय ने बकायदा गजट नोटिफिकेशन जारी करते हुए दैनिक समाचार में इसकी सूचना सार्वजनिक कर दी । खास बात यह है कि रेल मंत्रालय ने भूमि व्याप्त किए जाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए मात्र 30 दिनों का समय निश्चित किया है । आपको बता दें कि इस रेल मार्ग को जोड़े जाने में पुष्कर उपखंड की सीमा में स्थित गोयला , नांद, जसवंतपुरा सहित ग्रामीण इलाके शामिल है । जिनमें आने वाली जमीनों को अब उचित मुआवजा देकर अवाप्त किया जाएगा ।
# मेड़ता रेल मार्ग से जुड़ जाने के बाद पुष्कर से गुजरेगी देशभर में जाने वाली कई सुपर फास्ट ट्रेन ~
अब जब कि केंद्र सरकार ने इस मार्ग की प्रक्रिया शुरू कर दी है तो उम्मीद की जानी चाहिए कि अगले दो तीन सालों में पुष्कर मेड़ता रेल मार्ग से जुड़ जाएंगे । जुड़ने के बाद मेड़ता रूट से देश के कोने कोने में जाने वाली कई सुपर फास्ट ट्रेनें पुष्कर होकर भी गुजरेगी । इससे पुष्कर आने वाले लाखों देशी विदेशी सैलानियों को न सिर्फ देश कई शहरों में यहां से ही यात्रा करने की सुविधा मिल जाएगी बल्कि पुष्कर के स्थानीय लोग भी सीधे देश के बड़े शहरों से कनेक्ट हो जाएंगे । इसके बाद जो रेल यात्री अभी अजमेर जाकर ट्रेन में सवार होते है उन्हें यही से सुविधाजनक साधन मिल जाने से बड़ी राहत मिलेगी और पुष्कर रेलवे स्टेशन का भी तभी सही ढंग से सदुपयोग हो सकेगा ।
# मेड़ता से रेलमार्ग न जुड़ पाने के चलते पुष्कर रेलवे स्टेशन का भी नहीं हो पाया ज्यादा उपयोग •••
खास बात यह है कि तत्कालीन केंद्रीय राज्य मंत्री सचिन पायलट के व्यक्तिगत प्रयासों से 25 सालों के लंबे इंतजार के बाद पुष्कर को रेल मार्ग नसीब हुआ था । उस वक्त तत्कालीन रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने पुष्कर रेलवे स्टेशन का उद्घाटन कर पुष्कर वासियों को यह सौगात दी थी । लेकिन सचिन पायलट के सांसद पद से हटने के साथ ही पुष्कर रेलवे स्टेशन के बुरे दिन शुरू हो गए । उसके बाद यह केवल नाम मात्र का स्टेशन बनकर रह गया । बड़ी मुश्किल से दिनभर में केवल एक ट्रेन का संचालन किया जा रहा है जिसे भी कई बार बंद किया जा चुका है । अब सप्ताह में केवल पांच दिन एक ट्रेन आती है । केवल पुष्कर तक ट्रेन होने और अजमेर से यहां पहुंचने में लगने वाले ज्यादा समय के चलते इसमें यात्रा करने वाले लोगों की संख्या भी नाम मात्र की रहती है । यही वजह है कि बीते लंबे समय से यह रेल मार्ग अजमेर रेल मंडल के लिए भी एक बोझ जैसा बन चुका हैं । इतना ही नहीं देखरेख के अभाव में अत्याधुनिक तरीके से डिजाइन किया गया यह रेलवे स्टेशन कुछ ही सालों में बदहाली का शिकार हो चुका है । स्टेशन के अंदर और बाहर लगी ज्यादातर लाइट बंद पड़ी है । स्टेशन की दीवारों में बड़ी बड़ी दरारें आ चुकी है । यहां तक कि बिल्डिंग के बाहर लगी सैकड़ो टाइल्स भी गिर चुकी है ।
वाकई रेल मंत्रालय द्वारा भूमि अवाप्ति की सूचना जारी किए जाने के बाद पुष्कर के स्थानीय नागरिकों में भी खुशी का माहौल हैं। इस रेल मार्ग के जुड़ने से ना सिर्फ पुष्कर में यात्री भार बढ़ेगा बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी यह पुष्कर के विकास को नए पंख लगा देगा ।
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