Thursday, February 26, 2026
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“बोझ” तथागत बुद्ध के समय की घटना

मूकनायक /देश

राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा


एक वृद्ध व एक युवा भिक्षु भिक्षाटन के लिये किसी दूरस्थ गाँव को जा रहे थे | रास्ते में एक गहरी और तेज बहाव वाली नदी पड़ती थी | जब वह दोनों भिक्षु नदी को पार करके दूसरे किनारे पर पहुँच रहे थे | उसी समय एक सुन्दर युवती भी बीच धार में नदी को पार करने की कोशिस में नदी में हाथ पाँव मार रही थी | नदी का बहाव इतना तेज था कि एक स्त्री के लिए नदी पार कर पाना अत्यंत कठिन था | ऐसा लग रहा था कि शायद वह युवती नदी में डूब ही जायेगी |
युवा भिक्षु ने सुन्दर युवती को बचाने के लिए सोचा ही था कि वृद्ध भिक्षु ने समझाया कि तथागत द्वारा भिक्षुओं के लिए किसी स्त्री का स्पर्श वर्जित है |
युवा भिक्षु ने वृद्ध भिक्षु को अनसुना करके डूबती युवती की ओर छलांग लगा दी | तैर कर युवती को हाथ से पकड़कर किनारे लाने के लिए पुनः तैरने लगा | नदी में जहाँ भिक्षु के पैर जमीन को छूने लगे, युवा भिक्षु ने युवती को कंधे पर बैठाकर नदी पार की और नदी के छोर पर उतार दिया | युवती घबराहट से हाँफती हुई उठी दोनों भिक्षुओं प्रणाम करते हुए धन्यवाद दिया और अपने रास्ते पर चली गयी |
जब दोनों भिक्षुओं ने वापस आकर बुद्ध संघ में प्रवेश किया तो वृद्ध भिक्षु ने युवा भिक्षु का कारनामा बताकर बुद्ध से शिकायत की |
बुद्ध ने युवा भिक्षु का चेहरा हावभाव व नेत्रों से सब कुछ समझ लिया | फिर भी संघ को समझाने के लिए युवा भिक्षु से अपने पक्ष में सफाई देने की माँग की | युवा भिक्षु बोला भगवान जब मैं युवती को बाहर निकाल रहा था तब मुझे नहीं लग रहा था कि मैं एक स्त्री का स्पर्श कर रहा हूँ | उस समय मुझे लग रहा था कि मैं मानवता को बचा रहा हूँ | अब मैं उस स्त्री का स्पर्श भूल चुका हूँ |
तथागत बुद्ध उस वृद्ध भिक्षु के साथ संघ को संबोधित करते हुए कह रहे थे |
युवा भिक्षु ने तो युवती का बोझ अपने कंधे से उसी समय उतार दिया था जब वह नदी के छोर पर पहुँच गया था | लेकिन हमारे वृद्ध भिक्षु अभी तक उस युवती का बोझ अपने कंधे पर लादे हुये हैं | भिक्षु वर आपसे भी निवेदन है कि उस युवती का बोझ अपने कंधे से उतार दें | तभी आप धम्म पथ पर आगे बढ़ सकते हैं |
तथागत ने आगे समझाया जीवन प्रवाह में बहुत से अहितकारी संयोग विचार भावनाओं का हमारे मार्ग में आना स्वाभाविक है | जैसे राग द्वेष ईर्ष्या लोभ मोह मत्सर घृणा आदि | धम्म यात्री को इन्हें बोझ समझकर तुरन्त उतार फेंकना चाहिये | इस प्रकार का कोई बोझ आपके पास आने ही न पाये, उसके लिए मानव को पंचशील सिद्धांत धारण करना चाहिए |
यदि किसी कारणवश ऐसा संयोग उत्पन्न होता भी है तो – प्रज्ञा शील करुणा मैत्री का भाव आपके अन्तर्मन को धम्मपथ से विचलित नहीं होने देगा | आप सत्य मार्ग पर अग्रसर रहेंगे |
तथागत बुद्ध अपने श्रमण संघ के सदस्यों को इसी सरलता से शिक्षा देते थे |
नमो बुद्धाय 🙏🙏

लेखक
डी डी दिनकर (मैनेजर)
अध्यक्ष बीएसआई
फफूंद जिला औरैया यूपी

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