मूकनायक/ हरियाणा/करनाल
पत्रकार रमेश कुमार।
शिक्षा को लेकर बाबा साहब जी का मानना था कि यह शेरनी का दूध है और जो इसे पिएगा वह दहाड़ेगा.
उनका कहना था कि शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो.
शिक्षा के ज़रिए समाज में जागृति, समानता, स्वतंत्रता, विश्व बंधुत्व, सामाजिक न्याय, मानवता, आंदोलन शक्ति, और संगठन शक्ति का विकास होना चाहिए.
शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना सरकार का काम होना चाहिए.
छात्रों को शुरू से ही उचित प्रशिक्षण देना चाहिए.
शिक्षणासारखा दूसरा सर्वोत्तम गुरु नहीं होता.
स्त्रियों के सम्मानपूर्वक और स्वतंत्र जीवन के लिए शिक्षा बहुत ज़रूरी है.
डॉ. भीमराव अंबेडकर एक महान समाज सुधारक थे. उन्होंने दलितों, पिछड़ों, और अस्पृश्यों के ख़िलाफ़ अन्याय का विरोध किया और उनके उत्थान के लिए काम किया. उनका मानना था कि शिक्षा के ज़रिए ही गरीब और वंचित समाज आगे बढ़ सकता है.
महिलाओं के लिए भी बाबा साहब ने शिक्षा को जरूरी बताया

