Thursday, February 26, 2026
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परिवर्तन जीवन का शाश्वत क्रम है, उसमें स्वयं को समायोजित करना ही श्रेयष्कर

मूकनायक
देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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हम उन चीजों को सँभालने की कौशिश में लगे हुए हैं, जो सदा एक जैसी नहीं रह सकती। अवस्था भी हमारी नित्य बदल रही है। जैसे हम कल थे, वैसे आज नहीं है और जैसे आज हैं, वैसे कल नहीं रहेंगे। शरीर का कोई भरोसा नहीं है । इसलिए जो श्रेष्ठ कर्म करना चाहो, वो तुरंत कर लेना, समय कभी भी किसी का इन्तज़ार नहीं करता।
वहीं विचारों की भी अराजकता हमारे भीतर चल रही है। रोज नये विचार , नये उद्देश्य, नई दौड़ व नई उमंग होती है। आप स्वयं भी तो अपने भीतर हो रहे परिवर्तन को देख रहे हो। आप भी तो नित्य बदल रहे हो, फिर दूसरों के बदल जाने पर क्रोध क्यों करते हो ? परिवर्तन जीवन का साश्वत क्रम है, उसमें स्वयं को समायोजित करना ही श्रेयष्कर है…
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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