मूकनायक
राजस्थान /दौसा
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
दलित अधिकार केन्द्र के तत्वाधान में दिनांक 27 दिसंबर 2024 को जेंडर संवेदीकरण एवं सुरक्षात्मक नीतियों पर कार्यशाला आयोजन जैन धर्मशाला रेलवे स्टेशन के सामने जिला दौसा में किया गया।
शिविर में दलित अधिकार केंद्र के निदेशक एडवोकेट सतीश कुमार ने केन्द्र के बारे में परिचय देते हुए कहा कि केन्द्र दलित एवं महिलाओं पर अत्याचारों के मामलों में कानूनी हस्तक्षेप कर उन्हें न्याय दिलवाने का प्रयास करता है इसी के साथ दलित एवं महिलाओं के हित में पर भी काम करता है। अपने अधिकारों के लिए जागरूक होकर आगे आना होगा साथ ही कार्यक्रम का उद्देश्य बताते हुए एडवोकेट सतीश कुमार ने कहा कि सुरक्षा की जरूरत हमेशा कमजोर को ही होता है बच्चे एवं ,महिलाएं, दलित मे सुरक्षा की भावना भरकर भरकर आगे बढ़ना होगा हमें उनका विशेष ध्यान रखना होगा ताकि वे सुरक्षित महसूस कर सके जो सुरक्षा के बारे में बताते हुए कहा महिला एवं दलित व कमजोर तबके के लोग को सुरक्षा हेतु कानून का उपयोग में लेना होगा उनके लिए बहुत से कानून बनाए गए हैं हमें कानून को जागरुक होकर उपयोग में लाना होगा यह बात हमें ध्यान में रखने होंगई दलित एवं महिलाओं के लिए सर्वप्रथम बाबा साहब ने मतदान का अधिकार दिया। साथ ही महिलाओं महिलाओं को संपत्ति का अधिकार व समान काम के लिए समान वेतन जैसे अधिकारों की बात संविधान में रखी ताकि महिलाएं बराबरी से कंधा से कंधा मिलाकर देश का विकास कर सके
सुनीता देवी बैरवा जिला समन्वय दलित अधिकार केंद्र दौसा ने बताया कि दलितों पर अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं दलितों को कानून की जानकारी बहुत जरूरी है कानूनी जानकारी देते हुए अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1986 संशोधन 2015 के बारे में विस्तार पूर्वक बताया साथ ही घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 कार्य स्थल पर यौन शोषण अधिनियम वह कार्य स्थल पर यौन शोषण कमेटी जो की राष्ट्रीय स्तर गठित की जाती है ताकि कामकाजी महिलाओं के लिए होने वाले दुर्व्यवहार को दूर किया जा सके तथा समय पर उनकी सुनवाई हो सके, के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। साथ ही बाबा भीमराव अंबेडकर के विचारों को अपने जीवन में उतरने के लिए कहा साथ ही बाबा साहब ने हमें तीन मूल मंत्र दिए हैं शिक्षित बनो संगठित रहो संघर्ष करो आज भी हमें इस मूल मंत्र को अपने जीवन में उतरने की आवश्यकता हैदलितों को हो रहे अत्याचार का विरोध करना चाहिए साथ ही जो वास्तविक घटना है उसके बारे में फिर लिखवानी चाहिए घटना को तोड़ मैरोड कर पेश नहीं करना चाहिए तथा फिर लिखवाते समय किन-किन सावधानियां को बरतनाचाहिए चाहिए उसके बारे में विस्तार पूर्वक बताया गीता देवी प्रजापत गणनायक विकास संस्थान अध्यक्ष ने चर्चा करते हुए कहा कि देश में महिलाओं की स्थिति बिल्कुल दयनीय है। महिलाओं को जाति, लिंग व सत्ता की तिहरी मार झेलनी पड़ती है। महिलाओं को जागरूक होने की आवश्यकता है जिससे वो सशक्त एवं आत्मनिर्भर बन सकें।
गोवर्धन बरनाला सामाजिक कार्यकर्ता एवं संविधान जागृति मंच अध्यक्ष ने बताया कि समाज समाज का विकास महिला एवं पुरुष दोनों के सामंजस्य से ही संभव है दलित समुदाय एवं महिलाओं मैं एवं समाज में पाखंडवाद अंधविश्वास एवं भेदभाव फैला हुआ है जिसके कारण दलित एवं महिलाओं का विकास रुका हुआ है समानता स्थापित करने के लिए वर्ष कानून की आवश्यकता होती है महिलाओं को शिक्षित करने के लिए सर्वप्रथम सावित्रीबाई फुले ने स्कूल खोला था और महिलाओं को शिक्षा प्रदान की थी।
द्रोपती जोनवाल प्रेरक दलित आर्थिक अधिकार आंदोलन सामाजिक ने बताया कि दलितों को शिक्षा के प्रति जागरूक होना होगा और कानूनी जानकारी लेनी होगी इसके लिए हम सब इकट्ठे होकर प्रयासरत है।
आशा मीणा सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि सभी महिलाओं ,दलितों में, पिछड़े हुए वर्ग एवं बच्चों में भी आत्मविश्वास होना ।चाहिए तथा कानून की जानकारी होनी चाहिए हमें संघर्ष से घबराना नहीं है बल्कि मिलकर उसका सामना करना होगा।
गुलाब देवी बैरवा ठीकरिया सामाजिक कार्यकर्ता हमें आज कि आज के परिपेक्ष में कानूनी जानकारी का साथ ही शिक्षा एवं सामाजिक उत्थान की आवश्यकता है इसके लिए हम और प्रयास करेंगे कि दलित महिलाओं में बच्चों के लिए सुरक्षा हेतु बहुत से कानून बनाए गए हैं और कानून का पालन कर कर उन्होंने सुरक्षित वह सही ढंग से कानून को लागू करवाना हमारी जिम्मेदारी है सभी की मानसिकता संवेदनशील होनी चाहिए।
महिलाओं का प्रति संवेदनशील होना होगा
शिविर में सामाजिक कार्यकर्ता अपने-अपने विचार रखे।
उक्त शिविर में जिले के विभिन्न क्षेत्र 90 सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया
भवदीय
(सुनीता बेरवा)
जिला समन्वयक
दलित अधिकार केन्द्र, दौसा
मोब.-99822463 17

