मूकनायक/ देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जहां सूर्य की किरणे हो, वही प्रकाश होता है और जहां प्रेम की भाषा हो, वही परिवार होता है। जन्म लेना हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन इस जीवन को सुंदर व सुखमय बनाना हमारे हाथ में है, और जब सुख की संभावना हमारे हाथ में है, तो फिर यह दुख कैसा? यह शिकायत कैसी? हम क्यों भाग्य को कोसने और दूसरों को दोष दें?
जब सपने हमारे हैं तो कोशिश भी हमारी होनी चाहिए। जब पहुंचना हमें हैं तो यात्रा भी हमारी ही होनी चाहिए परंतु सच तो यह है कि जीवन की यह यात्रा सीधी और सरल नहीं है । इसमें दुख है, तकलीफ है, संघर्ष और परीक्षाएं भी है। ऐसे में स्वयं को हर स्थिति-परिस्थिति में, माहौल- हालात में, सजग एवं संतुलित रखना वास्तव में एक कला है। कभी गहराई से सोच कर स्वयं विचार करें…
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

