मूकनायक
देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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इंसान का सबसे अच्छा मित्र स्वयं की आत्मा और मन होता है जो अच्छी बातों पर शाबाशी देता है और बुरी बातों पर समझाता है । याद रखें – आत्म-सम्मान खोकर जो भी चीज मिलें, वो शोहरत तो दे सकती है, मगर सुकून नहीं दे सकती ।
कहते हैं कि लफ़्ज़ों का खेल है सारा, कोई सखा हो जाता है, कोई ख़फ़ा हो जाता है, तो कोई दफा हो जाता है। इसलिए जिन्हें पिता की नसीहतें और घर की मुसीबतें याद हैं, वे भूलकर भी गलत रास्तों पर नहीं जाते। बाकी:- जमाने की बातें, तो चुपचाप तौलती हैं । ये आँखे ही है, जो हमेशा सच बोलती हैं ।
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

