मूकनायक/ देश
*राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा*
बहुजनों के मसीहा, बहुजन नायक, क्रांतिकारी महान तपॅस्वी, महान त्यागी, बहुजनों के मार्ग दर्शक और वैज्ञानिक से बने समाजिक वैज्ञानी मान्यवर साहेब श्री कांशीराम जी के त्याग और संघर्ष भरे जीवन की दास्तान हम आपके साथ सांझा करते हैं।
1985 के समय पंजाब के जालंधर शहर में 2 उपचुनाव होने वाले थे एक उत्तरी जालंधर से और दूसरा मध्य जालंधर से उस समय सुरजीत सिंह बरनाला की सरकार थी, जो मिलीभगत से बनी थी केंद्र के राजीव गांधी की सरकार थी।
अकालियों ने दोनों सीटें बसपा के लिए छोड़ दी थीं। यह समझौता उस समय बरनाला सरकार में वित्त मंत्री बलवंत सिंह कंबोज और बामसेफ के बीच हुआ था। समझौते में यह भी शर्त थी कि यदि बसपा अधीनस्थ दोनों सीटों पर जीत हासिल करती है तो एक-आधे को कैबिनेट मंत्री भी लिया जाऐगा और निगमों के अध्यक्षों/चेयरमैन में भी शामिल किया जाऐगा।
बलवंत सिंह ने बामसेफ के लोगों के साथ बैठक की और उनसे भाजपा उम्मीदवार को चुनाव में शामिल करने के लिए कहा। कहीं न कहीं साहेब भी इस समझौते से सहमत थे लेकिन साहेब खुश नहीं थे। क्योंकि उस समय साहेब और बामसेफ के कार्यकर्ताओं के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा था।
उत्तरी जालंधर से मास्टर दौलत राम नकोदर और मध्य जालंधर से बाबू राम बाल्मीकि उम्मीदवार थे। इसी सिलसिले में एक खचाखच भरी रैली को संबोधित करने के लिए साहेब राम नगर पहुंचे थे। उत्तरी जालंधर से हाथी और मध्य जालंधर से ऊंट का चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया। कुछ कार्यकर्ताओं ने मंच पर ही साहेब से शिकायत करते हुए कहा था कि सेंट्रल जालंधर से पंजाब चुनाव आयोग ने जानबूझकर हमें चुनाव चिन्ह दिया है। वहीं उस समय कांशीराम का हाथी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो गया था। साहेब ने मंच पर उनका मजाक उड़ाया और कहा कि मुझे भी लगता है कि इनके होंठ ऊंट जैसे क्यों हैं। साहेब ने एक और ऐतिहासिक बात कही जो होश उड़ाने वाली है कि जब मैं निकम्मे / नलाइक लोगों के साथ गधों जैसा व्यवहार करके इतना बड़ा आंदोलन चला सकता हूं तो क्या चुनाव आयोग हमें हाथी या गधे के चुनाव चिन्ह की जगह ऊंट चुनाव चिन्ह आवंटित करता है। हमें फिर भी जह चुनाव हर हाल में लड़ना ही लड़ना है।
मेरी एक बात याद रखना, चुनाव चिन्हों के पीछे भागने का प्रयास ना करें, बहुजन समाज के महांपुरुषों की विचारधारा के पीछे भागने का प्रयास करें। क्योंकि आंदोलन से चुनाव चिन्ह का कोई खास लेना-देना नहीं है- साहेब कांशीराम।
प्रस्तुत करते है
इंजीनियर तेजपाल सिंह
94177-94756
जुॅग पलटाऊ बहुजन महां-नायक
पुस्तक -मैं कांशीराम बोलता हूं।
पम्मी लालो मजारा (बंगा नवांशहर)

