Thursday, February 26, 2026
Homeदेशचेहरे में प्रसन्नता और हृदय में पवित्रता हो तो इससे बढ़कर नहीं...

चेहरे में प्रसन्नता और हृदय में पवित्रता हो तो इससे बढ़कर नहीं हो सकता सुखद एवं श्रेष्ठ जीवन

मूकनायक
देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍🏻✍🏻
चरित्र और वस्त्र कितने भी चमकदार हो, देखने वाला सिर्फ दाग पर ही ध्यान देगा.. उदासी में किये गये प्रत्येक कर्म में पूर्णता का अभाव पाया जाता है। हमें प्रयास करना चाहिए कि प्रत्येक कर्म को प्रसन्नता के साथ किया जाए। निष्कपट, निर्दोष और निर्वैर भाव ही हृदय की पवित्रता है।
यदि जीवन में कोई बहुत बड़ी उपलब्धि है तो वह हमारे हृदय की पवित्रता ही है। पवित्र हृदय से किये गये कार्य भी पवित्र ही होते हैं। हमारी जिह्वा में सत्यता हो, चेहरे में प्रसन्नता हो और हृदय में पवित्रता हो तो इससे बढ़कर सुखद एवं श्रेष्ठ जीवन और नहीं हो सकता है…
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments