Thursday, February 26, 2026
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कविता

मूकनायक राजस्थान अजमेर तहसील टांटोटी नारायण लाल गोठवाल शोकली

👉🏻है ऊँच नीच का रोग जहाँ, मैं उस देश की गाथा गाता हूँ…..
भारत में रहने वालों की, मैं दोगली बात बताता हूँ……

है! भगवानों के कई नाम यहाँ, मूर्ति पूजी जाती है..….
मन्दिर में जाने वालों की, जाति पूछी जाती है……

शूद्रों से दूर जहाँ, भगवान को रखा जाता है…..
इंसानो से भेदभाव जहाँ, पशु को कहते माता हैं….

ऐसे पाखण्डी लोगों का, मैं पाखण्ड बाताने आता हूँ…….
है ऊँच नीच का रोग जहाँ, मैं उस देश की गाथा गाता हूँ…………..

नाम धर्म का लेकर जहाँ, लोगों का शोषण होता है….
कर्महीन इंसान जहाँ, भगवान भरोसे सोता है…..

भगवानों के नाम जहाँ, डर फैलाया जाता है……
पढ़ा लिखा इंसान जहाँ, विवेकहीन हो जाता है….

विश्व को कूटुम्ब कहने की, हक़ीक़त मैं बाताता हूँ…..
है ऊँच नीच का रोग जहाँ, मैं उस देश की गाथा गाता हूँ…………..

दूल्हा नहीं बैठे घोड़ी पर, इस पर अगड़ी जाति अड़ती है….
बारात निकासी ख़ातिर जहाँ, पुलिस बुलानी पड़ती है…..

विद्या के घर में भी जहाँ, जाति से पंक्ति लगती है…..
दान पुण्य के नाम यहाँ, एक ही जाति ठगती है…..

धर्म भीरू है लोग जहाँ, मैं उसके किस्से बाताता हूँ….
है ऊँच नीच का रोग जहाँ, मैं उस देश की गाथा गाता हूँ…..

जाति का लेकर नाम जहाँ, गाली बोली जाती है…..
अगर अछूत प्रेम करे तो, फाँसी दे दी जाती है…..

नीची जाति वालों में, दहशत फैलायी जाती है…..
परम्पराओं के नाम जहाँ, स्वार्थ का पोषण बाताता हूँ…..
है ऊँच नीच का रोग जहाँ, मैं उस देश की गाथा गाता हूँ……

यदि पूजा-पाठ करने से ही बुद्धि और शिक्षा आती तो पुजारियों की औलादें ही विश्व में वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर होते! वहम से बचो अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवाओ क्योंकि शिक्षा से ही वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर और शासक बनते हैं। पूजा-पाठ से नहीं! अतः वहम का कोई ईलाज नहीं, और शिक्षा का कोई जवाब नहीं!

शिक्षित बनो !! संगठित बनो !!
भेदभाव त्यागो…….

भागचन्द बैरवा शेरगढ़
राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य
अखिल भारतीय बैरवा महासभा

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