मूकनायक/ देश
“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”
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बाबा साहब जी की दो आंखें मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण पहलू है जिनसे हम अपने दोनों तरह के नैतिक बोध को समझ सकते हैं और अनुकरण से अपने साथ साथ समाज को भी बदल सकते हैं एवं एक प्रबुद्ध भारत का निर्माण कर सकते हैं।
यह दो आंखें कौन है ❓ यह समझने का प्रयास करते हैं
👁️ भारत का संविधान 👉🏾 यह पहली आंख है जिसके दृष्टि से अपने नैतिक जिम्मेदारी को बखूबी अदा कर सकते हैं यह हमारे कर्म की सुचिता को बनाए रखने में मदद करेगा इस दिव्य ज्योति से देखने से समता के अनुपालन की सीख मिलती है जो सामाजिक उत्थान का महत्वपूर्ण आधार बिंदु है इस आंख की महत्वता के लिए संविधान के भाग 3 मूल अधिकार भाग 4 नीति निर्देशक तत्व भाग 4 क मूल कर्तव्य की समझ होनी चाहिए।।
👁️ बुद्ध एवं उनका धम्म 👉🏾 यह मानसिक चेतना वृद्धि का प्रयास था बिना मानसिक चेतना के कार्मिक परिवर्तन सम्भव नहीं है इसलिए मानसिक चेतना कर्म के प्रति अवश्य होनी चाहिए और उसकी शुरूआत सम्यक दृष्टि से होती है सम्यक समाधि पर समाप्त होती है सम्यक् जीवन जीने का एक श्रेष्ठतम तरीका है जब हम बिना आसक्ति के भोग भोगते हैं और अपराध से बच जाते हैं आसक्ति ही अपराध की जननी है
दोनों आंखों की दिव्य दृष्टि का अनुकरण कर अपने जीवन के साथ सामाजिक उत्थान बड़ी सहजता से कर सकते हैं
लेकिन कितनी बड़ी विडंबना की बाबा साहब की बात करने वाले आज भी इन दो आंखों के वास्तविक अस्तित्व को नहीं समझ पाए न देश का आम जनमानस
एक जन कल्याण का हेतु तो वहीं दूसरी मानसिक कल्याण हेतु है । बाकी बाबा साहब जी अनेक पुस्तकों कि रचना की जो हमें भूत भविष्य दोनों का दर्शन करा रही है वह चर्चा की नहीं बल्कि भविष्य के सीख के लिए है।।
चर्चा तो इन दो आंखों पर होनी चाहिए जो जन जन के मार्गदर्शक हैं।
काश हम सब वास्तविक इनकी हकीकत को समझ पाते और जीवन को मार्गदर्शन कर पाते क्योंकि इनके मानव समाज के साथ सभी जीवों एवं देश के कल्याण का अंत: भाव निहित है।।
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लेखक ::
कलम क्रांति की है जननायक
भारत दास कौन्तेय सतना मध्यप्रदेश

