Thursday, February 26, 2026
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“विचित्र किंतु सत्य”

मूकनायक /देश

“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”

🍏 चूहे को देखते ही बिल्ली उसको पकड़ने की कोशिश करती है, ठीक उसी प्रकार बिल्ली को कुत्ता पकड़ने की कोशिश करता है।
🍎🍎 अगर बिल्ली के सामने एक मिट्टी का चूहा रखा जाए तो क्या बिल्ली उसको पकड़ने जाएगी- बिल्कुल नहीं।
🍏🍏 कुत्ते के सामने एक मिट्टी की बिल्ली बना कर रखी जाए तो क्या कुत्ता उस बिल्ली को पकड़ेगा- बिल्कुल नहीं।
👉ऐसा क्यों?
🍎🍎 कयोकि कुत्ते और बिल्ली को पता है कि उसके सामने जो टारगेट रखा है वह नकली है बेजान है इससे उसे कुछ हासिल होने वाला नहीं है इसलिए कुत्ता और बिल्ली उस नकली चीज को नहीं पकड़ता है।
🍏🍏 एक इंसान ही है जो की मिट्टी और पत्थर की मूर्तियों में अपनी समस्याओं का हल खोजता है।
🧠🧠 इसका मतलब ये हुआ कि ऐसे लोगो का मेंटल लेबल कुत्ते-बिल्ली से भी नीचे है उनके अन्दर कुत्ते-बिल्ली के बराबर भी निर्णय लेने की क्षमता नहीं है।
🧠🧠 ऐसे ही लोग मानसिक रूप से अपाहिज/विकलांग होते हैं, मानसिक रूप से गुलाम होते हैं।
🍏🍎 बहुजन समाज के सामने जो समस्याएं उतपन्न हो रही उसका कारण बहुत हद तक ऐसे ही लोग हैं।
👉 ऐसे ही लोगो की वजह से वैचारिक क्रांति नहीं हो पा रही है। लेखक:
🅰️🅿️

💎समाजिक क्रांति के बिना- राजनैतिक और धर्मिक क्रांति अर्थहीन है।💎
:-डॉ अम्बेडकर
जय भीम जय भारत जय संविधान

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